इस मंदिर में चूहे करते है लोगों की मनोकामना पूरी, जानें इसके पीछे का रहस्य

इस मंदिर में चूहे करते है लोगों की मनोकामना पूरी, जानें इसके पीछे का रहस्य

नई दिल्ली: भारत में 10 लाख से भी ज्यादा मंदिर हैं,जिनका अपना अलग इतिहास रहा है। वहीं भारत में एक ऐसा मंदिर है जहां चूहों का राज चलता है। वहीं माना जाता है कि इस मंदिर में विराजमान माता तभी खुश होती है जब उन चूहों को खुश रखा जाएं। वैसे अगर आपके घर में एक भी चूहा दिख जाए तो आप उसे भगाने में कोई कसर नहीं छोड़ते है क्योंकि चूहों से प्लेग जैसी खतरनाक बीमारीयों का खतरा होता है। लेकिन राजस्थान में माता का एक ऐसा मंदिर है जहां पर 20 हजार से भी ज्यादा चूहों का वास है और इस अद्भूत मंदिर में आपको चूहों का जूठा प्रसाद ही खिलाया जाता है।

बता दें कि यह मंदिर राजस्थान के बीकानेर से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है। देशनोक में स्थित इस नायाब मंदिर को चूहों का मंदिर,चूहों वाली माता और मूषक मंदिर के नाम से जाना जाता है। मंदिर में इतने सारे चूहे है कि इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि मंदिर में आप अगर आपको आगे बढ़ना है तो पैरों को घसीटकर ही चलना होता है। वो इसीलिए कि पैर उठाकर चलने से कोई काबा पैर के नीचे ना आएं,अगर आ जाएं तो  इसे अशुभ माना जाता है। लोगों का मानना है कि जगदंबा माता का जन्म 1387 में एक चारण परिवार में हुआ था और इन के बचपन का नाम रिघुबाई था। इनका विवाह साठिका गांव के किपोजी चारण से हुई थी। लेकिन सांसरिक जीवन में मन ऊब जाने के बाद उन्होंने किपोजी चारण की शादी अपनी छोटी बहन से करवादी और खुद माता की भक्ति और लोगों की सेवा में लीन हो गई।

उनके द्वारा की गए मदद और चमत्कारिक शक्तियों के कारण वहां के लोग उन्हें करणी माता के नाम से पूजने लगे। ऐसा कहा जाता है कि माता 151 वर्ष तक जीवित रहीं और बाद में उनकी मूर्ति की स्थापना कर लोगों ने पूजा-पाठ शुरू कर दी।जानकारी के मुताबिक जहां काले चूहों के साथ-साथ सफेद चूहे भी मौजूद है,जिन्हें बेहद पवित्र माना जाता है। भक्तों की ऐसी मानयता है कि एक बार करणी माता का परिवार कपिल सरोवर में डूब कर मर गया था,जिसके बाद  जब मां को यह बात पता चली तो उन्होंने मृत्यु के देवता यम से अपने परिवार को जीवित करने की काफी प्रार्थना की, जिसके बाद यमराज ने विवश होकर उसे चूहे के रूप में पुनर्जीवित किया।

 

 

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