दूषित पानी से जान गंवाने वालों के परिजनों मिले राहुल गांधी, पीड़ित परिवार को दी इतने लाख की मदद

Rahul Gandhi Indore Visit: कांग्रेस नेता राहुल गांधी शनिवार, 17 जनवरी को इंदौर में पानी से हुई संदूषित पानी की समस्या के कारण उल्टी और दस्त की बीमारी से प्रभावित मरीजों और उनके परिवारों से मिलने पहुंचे। उन्होंने बॉम्बे अस्पताल का दौरा किया, जहां चार मरीज इलाज के तहत थे। राहुल गांधी ने उनकी सेहत के बारे में जानकारी ली और उनके परिवारों से बातचीत की। इस दौरान मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जितु पाटवारी और पार्टी के नेता उमंग सिंघार भी उनके साथ थे।
स्थानीय लोगों ने किया दावा
राहुल गांधी ने भगीरथपुरा क्षेत्र का भी दौरा किया, जहां यह बीमारी पिछले महीने फैली थी। उन्होंने वहां उन परिवारों से मुलाकात की जिनके सदस्यों की मौत हुई थी और उन्हें सांत्वना दी। भगीरथपुरा में राहुल गांधी के दौरे को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए और कई जगह बैरिकेड्स लगाई। स्थानीय लोगों का दावा है कि इस बीमारी के कारण अब तक भगीरथपुरा में 24 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। वहीं, राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में अपनी स्थिति रिपोर्ट में मरने वालों की संख्या सात बताई है, जिसमें एक पांच महीने का शिशु भी शामिल है।
रिपोर्ट में कही गई ये बात
इस बीच, महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की एक सरकारी समिति द्वारा तैयार किए गए ‘मृत्यु ऑडिट’ रिपोर्ट में कहा गया है कि भगीरथपुरा में 15 लोगों की मौत इस बीमारी से किसी न किसी रूप में जुड़ी हो सकती है। प्रशासन ने बीमारी के फैलने के बाद जान गंवाने वाले 21 परिवारों को हर एक को दो लाख रुपये की आर्थिक मदद दी है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ मौतें अन्य बीमारियों या कारणों से हुई हैं, लेकिन सभी परिवारों को मानवता के आधार पर सहायता प्रदान की गई।
प्रभावित परिवारों को किया आश्वस्त
राहुल गांधी ने इस अवसर पर कहा कि सरकार को पानी की सफाई और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने प्रभावित परिवारों को आश्वस्त किया कि कांग्रेस इस मामले को गंभीरता से उठाएगी और लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएगी। ये दौरा स्थानीय लोगों में संवेदनशीलता और सहानुभूति का प्रतीक माना जा रहा है, जबकि प्रशासन और सरकार पर भी इस घटना को रोकने और जिम्मेदारी तय करने का दबाव बढ़ गया है।
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