Supreme Court: राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि केस में बुधवार यानी 9 सितंबर को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने दो टूक कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं। साथ ही शिकायतकर्ता से प्रक्रिया का पालन करने को कहा।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट में शिकायतकर्ता की तरफ से पेश हुए एडवोकेट गौरव भाटिया ने कहा कि राहुल गांधी कोई बीबीआईपी नहीं है और मजिस्ट्रेट की तरफ से संज्ञान लेने के खिलाफ राहुल गांधी की ओर से दायर अपील सुप्रीम कोर्ट में 5 महीनों से सुनवाई के लिए लिस्ट नहीं की गई है।
क्या है पूरा मामला
राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला उनके एक बयान से जुड़ा है। उन्होंने कहा था कि अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिक भारतीय सेना के जवानों की पिटाई कर रहे हैं। यह बयान राहुल गांधी की ओर से लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर चीन की हरकतों लेकर सरकार की आलोचना करते हुए दिया था।
राहुल गांधी पर क्या है आरोप
नेता विपक्ष राहुल गांधी पर भारतीय सेना का अपमान करने का आरोप लगा है। एडवोकेट विवेक तिवारी ने आरोप लगाया कि 9 दिसंबर 2022 को भारत और चीन की सेनाओं के बीच हुई भिड़ंत को लेकर 16 दिसंबर 2022 को राहुल गांधी ने भारतीय सेना के लिए अपमानजनक और मानहानि करने वाली टिप्पणी की थी। इस मामले में 24 मार्च को राहुल गांधी को एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पेश होने का आदेश दिया था। जिसके बाद आदेश को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था।
राहुल पहुंचे सुप्रीम कोर्ट
हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी थी और कह कि सीआरपीसी की धारा 199 (1) के तहत कोई व्यक्ति जो किसी अपराध का सीधा पीड़ित नहीं है, उसे भी पीड़ित व्यक्ति माना जा सकता है। अगर उस अपराध से उसे नुकसान पहुंचा हो या उस पर बुरा असर पड़ा है। इसके बाद राहुल गांधी ने सु्प्रीम कोर्ट का रुख किया।
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