
Three Royal Bath In Pryagraj Mahakumbh: मौनी अमावस्या का शाही स्नान के बाद अगले महीने यानी फरवरी में तीन बड़े शाही स्नान होने जा रहा है। इन तीनों शाही स्नान का काफी धार्मिक महत्व है। बता दें कि, 144 साल के बाद प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन हुआ है। हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रत्येक 12 पूर्णकुंभ के बाद एक महाकुंभ होता है।
इस बार महाकुंभ की शुरुआत 13 जनवरी से हुई थी और 26 फरवरी तक चलेगी। महाकुंभ में मुख्य आकर्षण का केंद्र साधु-संत होते हैं। साधु-संतों के स्नान करने का अंदाज निराला होता है। खासकर शाही स्नान और अमृत स्नान। साधु-संतों का हठ योग, साधना देखने लायक होता है। अमृत स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।
फरवरी में तीन बड़े शाही स्नान
आपको बता दें कि फरवरी महीने में महाकुंभ में तीन बड़े शाही स्नान होंगे। पहला स्नान बसंत पंचमी के दिन होगा। इस दिन के अमृत स्नान का महत्व विशेष है। अमृत स्नान के दिन नागा साधु अपने शिष्यों के साथ भव्य जुलूस निकालते हैं। अमृत स्नान को अत्यधिक पुण्यदायक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाकुंभ में अमृत स्नान के समय गंगा और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करना शुभ माना जाता है।
दूसरा शाही स्नान माघ पूर्णिया पर होगा। इस दिन को बेहद ही शुभ माना जाता है। माघ पूर्णिया का पवित्र स्नान 12 फरवरी को होगा। वहीं, फरवरी महीने का तीसरा शाही स्नान 26 फरवरी को होगा। इस दिन महाशिवरात्री है और इस दिन का शाही स्नान भी बेहद शुभ माना जाता है।
शाही स्नान का महत्व
हिन्दू धर्म के अनुसार शाही स्नान का महत्व बहुत ज्यादा है। शाही स्नान के दिन गंगा स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। शाही स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ती होती है। पितर दोष भी दूर होते हैं। महाकुंभ मेले में किसी भी दिन स्नान करने से विशेष फल की प्राप्ती होती है। वहीं, शाही स्नान करने से अमरत्व की प्राप्ती होती है।
Leave a comment