
नई दिल्ली: दुनिया में अनेक जनजातियां रहती है जिसकी कुछ जातियों के बारे में लोग जाते है तो कुछ के बारे में कम ही लोग जाते है। इन जनजातियों की खास ये बात होती है कि इनकी कुछ अजीबो-गरीब पंरपरा होती है जो आज भी वो निभाते है। ऐसे में एक जनजाति की चर्चा दुनिया में हो रही है। जिसके बारे में कहा जा रहा है कि ये जनजाति अपने ही रिश्तेदारों को खा लेते है।
दरअसल इस जनजाति को पापुआ न्यू गिनी के नाम से पहचाना जाता है। इस जनजाति की अपनी अलग रिति रिवाज होते है और इसके बारे में सरकार भी कुछ नहीं कह सकती है। वहीं इन जनजाति को खतरनाक भी माना जाता है। इन जनजातियों के बारे में कहा जाता है कि अगर इनमें से किसी भी शख्स की मौत हो जात है तो उसे दफनाने की बजाए उसको पकाकर खा लिया जाता है हाललांकि, पित्ताशय को नहीं खाया जाता है।
ये जनजाति किसी व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया जाता था, तो वहां ऐसी दावत का आयोजन किया जाता था। इन आयोजनों में लोग अपने मरने वाले रिश्तेदारों का मांस खाते थे, तो वहीं उनका दिमाग महिलाएं खाती थीं। अपने प्रिय लोगों के सम्मान के तौर पर इस प्रथा का पालन किया जाता था। यह जनजाति मानती थी कि अगर शरीर को दफना दिया जाता है या कहीं पर रखने से कीड़े खाते हैं। इससे अच्छा है कि मृतक से प्यार करने वाले लोग शरीर को खा जाएं।
इसके अलावा मांस के खाने से उन जनजातियों के लोगों को एक बीमारी हो रही है जिसमें इसकी मौत हो रही है। वह इस बीमारी से चल फिर नहीं पाते थे और खाना खा नहीं पाते थे। इसकी वजह से धीरे-धीरे कमजोर हो जाते थे और मौत हो जाती थी। इस जनजाति के लोग इस बीमारी कुरु नाम दिया जिसका मतलब 'डर से कांपना है। इन जनजाति के लोग यह नहीं जानते थे कि मानव मस्तिष्क में एक घातक अणु पाया जाता है जिसके खान पर मौत हो सकती है।
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