क्या है गुलेन बैरी सिंड्रोम और इसके लक्षण? जिसने महाराष्ट्र में मचाई दहश्त

क्या है  गुलेन बैरी सिंड्रोम और इसके लक्षण? जिसने महाराष्ट्र में मचाई दहश्त

What Is Guillain Barrie Syndrome: महाराष्ट्र के पुणे से गुलेन बैरी सिंड्रोम (GBS) नामक बीमारी का मामला सामने आया है। मिली जानकारी के अनुसार, इस बीमारी ने एक हफ्ते के अंदर 100 से ज्यादा लोगों को अपने चपेट में ले लिया है। जबकि 16 मरीज वेंटिलेटर पर हैं। इसके अलावा सोलापुर से भी इस बीमारी से एक मरीज की मौत की भी खबर सामने आई है। हालांकि, इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन क्या आप जानते है कि गुलेन बैरी सिंड्रोम क्या है? इसके लक्षण क्या हैं? इससे बचने के तरीके क्या हैं? 

क्या है गुलेन बैरी सिंड्रोम?

दरअसल, गुलेन बैरी सिंड्रोम एक ऑटोइम्यून न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है। इस बीमारी में हमारा इम्यून सिस्टम अपनी ही नर्व्स पर अटैक करता है। इस वजह से लोगों को उठने-बैठने और यहां तक कि चलने तक में समस्या होती है। इसके अलावा लोगों का सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है।

बता दें, हमारा नर्वस सिस्टम दो हिस्सों में होता है। पहले हिस्से को सेंट्रल नर्वस सिस्टम कहते है। जिसमें रीढ़ की हड्डी और ब्रेन वाला पार्ट होता है। तो वहीं, दूसरे हिस्से में पेरिफेरल नर्वस सिस्टम आता है। इसमें पूरे शरीर की अन्य सभी नर्व्स होती हैं। गुलेन बैरी सिंड्रोम में इम्यून सिस्टम नर्वस सिस्टम के दूसरे हिस्से यानी पेरिफेरल नर्वस सिस्टम पर ही हमला करता है।

गुलेन बैरी सिंड्रोम  के लक्षण

बता दें, गुलेन बैरी सिंड्रोम की शुरुआत आमतौर पर हाथों और पैरों में कमजोरी से होती है। ये लक्षण तेजी से फैल सकते हैं। धीरे-धीरे ये लक्षण लकवे में बदल सकते हैं। इसके अलावा सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। इसके अलावा पेशाब और मल त्यागने में भी समस्या होती है। मांसपेशियों में तेज दर्द की समस्या होती है। बोलने, चबाने या खाना निगलने में भी दिक्कत का सामना करना पड़चा है।

गुलेन बैरी सिंड्रोम  से बचने के उपाया

बताया जा रहा है कि गुलेन बैरी सिंड्रोम का कोई सटीक इलाज नहीं है। लेकिन इसके लक्षणों को कम करने और रिकवरी की प्रक्रिया को तेज करने के लिए इलाज होता है।

1. प्लाज्मा एक्सचेंजः इसमें ब्लड की प्लाज्मा को बदलने की प्रक्रिया शामिल होती है। जिससे शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाला जाता है और नर्वस सिस्टम को राहत मिलती है।

2 इम्यूनोग्लोबुलिन थेरेपीः इसमें इम्यून सिस्टम के खिलाफ काम करने वाले एंटीबॉडी की एक खुराक दी जाती है। जो तंत्रिका कोशिकाओं को अधिक नुकसान से बचाती है। इसके अलावा, मरीज को पेन किलर  और फिजियोथेरेपी की भी सलाह दी जाती है।

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