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Noida News: हवा से बनेगा पीने का पानी! नई मशीन से दूर होगा पेयजल संकट, जानें कैसे करती है काम?

Noida News: हवा से बनेगा पीने का पानी! नई मशीन से दूर होगा पेयजल संकट, जानें कैसे करती है काम?

Noida News: देश के कई हिस्सों में गिरता भूजल स्तर, बढ़ता प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन पेयजल संकट को लगातार गंभीर बना रहे हैं। ऐसे समय में हवा में मौजूद नमी से पीने का पानी बनाने वाली नई तकनीक लोगों का ध्यान खींच रही है। इस तकनीक में नल, बोरिंग या किसी पारंपरिक जल स्रोत पर निर्भरता कम करने की कोशिश की गई है। ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल हॉस्पिटैलिटी एक्सपो में एक निजी कंपनी ने एटमॉस्फेरिक वाटर जनरेटर (AWG) मशीन पेश की है। कंपनी के मुताबिक, यह मशीन वातावरण में मौजूद नमी को पानी में बदलकर उसे फिल्टर और शुद्ध करती है। इसके बाद तैयार पानी को पीने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

कैसे हवा से पानी बनाती है मशीन?

कंपनी की मार्केट हेड शिविका के अनुसार, मशीन हवा में मौजूद नमी को एक विशेष प्रक्रिया के जरिए संघनित करती है। इसके बाद पानी को कई स्तरों की फिल्ट्रेशन और शुद्धिकरण प्रक्रिया से गुजारा जाता है। कंपनी का दावा है कि इस प्रक्रिया के बाद पानी पीने योग्य हो जाता है। इस तकनीक की खास बात यह है कि इसके लिए भूजल या किसी नदी, तालाब और अन्य पारंपरिक जल स्रोत की जरूरत नहीं होती। ऐसे इलाकों में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है, जहां पानी की कमी बड़ी समस्या है।

घर से लेकर होटल तक हो सकता है इस्तेमाल

कंपनी के मुताबिक, इस मशीन को घर के अंदर या बाहर लगाया जा सकता है। मशीन से सामान्य, ठंडा और गर्म पानी भी उपलब्ध कराया जा सकता है। इसे घरों के अलावा होटल, एयरपोर्ट, अस्पताल, स्कूल, कॉर्पोरेट ऑफिस और आवासीय परिसरों में इस्तेमाल किया जा सकता है। कंपनी इसे ग्रीन टेक्नोलॉजी पर आधारित बताती है। इसका उद्देश्य पानी की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ प्लास्टिक की बोतलों पर निर्भरता कम करना भी है।

बिजली की खपत भी कम होने का दावा

कंपनी का दावा है कि मशीन ऊर्जा दक्ष तकनीक पर काम करती है और इसकी बिजली खपत काफी कम है। कंपनी के अनुसार, इसका इस्तेमाल करने पर संचालन लागत भी कम रह सकती है। हालांकि, इस तकनीक की वास्तविक उपयोगिता अलग-अलग जगहों की हवा में मौजूद नमी, तापमान और बिजली की उपलब्धता पर निर्भर करेगी। इसके बावजूद बढ़ते जल संकट के बीच हवा से पानी बनाने वाली यह तकनीक भविष्य के लिए एक वैकल्पिक जल स्रोत के तौर पर महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

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