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New Labour Code: 4 दिन काम, 3 दिन छुट्टी! नए लेबर कोड में कर्मचारियों को क्या मिलेगा?

New Labour Code: 4 दिन काम, 3 दिन छुट्टी! नए लेबर कोड में कर्मचारियों को क्या मिलेगा?

New Labour Code: लंबे समय से चर्चा में रहे नए लेबर कोड (New Labour Code) के सभी नियम सरकार ने जारी कर दिए है। इस नए नियम में कर्मचारियों की सैलरी, PF, ग्रेच्युटी, छुट्टियां और काम के घंटों से जुड़े काफी अहम नियम सामने आए है। बता दें कि केंद्र सरकार ने चार नए लेबर कोड तैयार किए हैं, जिनका मकसद देश के श्रम कानूनों को आसान और आधुनिक बनाना बताया जा रहा है। हालांकि अभी सभी राज्यों में इन नियमों को पूरी तरह लागू नहीं किया गया है, लेकिन इनके प्रमुख प्रावधान सामने आ चुके हैं।

क्या है 48 घंटे काम का नियम?

नए लेबर कोड के तहत किसी भी कर्मचारी से एक सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे काम लिया जा सकेगा। इसका मतलब यह नहीं कि रोज़ 8 घंटे ही काम करना होगा। कंपनियां चाहें तो 4 दिन में 12-12 घंटे काम कराकर 3 दिन की छुट्टी दे सकती हैं। यानी कर्मचारियों को “4 Day Work Week” का विकल्प भी मिल सकता है।

सैलरी स्ट्रक्चर में क्या होगा बदलाव?

नए नियमों के मुताबिक बेसिक सैलरी (Basic Pay) कुल CTC का कम से कम 50% होना जरूरी होगा। इससे कर्मचारियों के PF और ग्रेच्युटी में बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि हाथ में मिलने वाली टेक-होम सैलरी कुछ कम हो सकती है क्योंकि PF कटौती बढ़ जाएगी।

PF और ग्रेच्युटी पर क्या असर?

बेसिक सैलरी बढ़ने से कर्मचारी और कंपनी दोनों का PF योगदान बढ़ेगा। इसका फायदा यह होगा कि रिटायरमेंट के समय ज्यादा रकम मिलेगी। वहीं ग्रेच्युटी की गणना भी बेसिक सैलरी के आधार पर होती है, इसलिए ग्रेच्युटी अमाउंट में भी इजाफा संभव है।

छुट्टियों और ओवरटाइम का नियम

नए लेबर कोड में कर्मचारियों को हर 5 घंटे के काम के बाद आधे घंटे का ब्रेक देने का प्रावधान है। इसके अलावा ओवरटाइम के लिए कर्मचारियों की सहमति जरूरी होगी और अतिरिक्त काम के बदले अतिरिक्त भुगतान भी देना होगा।

11. कर्मचारियों का फ्री हेल्थि चेकअप।

12. सुरक्षित वर्कप्लेस बनाना कंपनी की जिम्मेअदारी होगी।

13. सरकार के आदेश अनुसार Safety Committee बनानी होगी।

14. कंस्ट्रेक्शन सेक्टर में 250 से ज्यादा कर्मचारी और माइंस में 100 से ज्यादा वर्कर्स पर सेफ्टी ऑफिसर जरूरी है।

15. हेल्थ् और वेलफेयर फैसिलिटी जरूरी।

16. 100 या अधिक वर्कर पर कैंटीन जरूरी।

17. Mines और 500+ workers वाले construction sites पर ambulance room जरूरी।

18. महिलाएं सभी सेक्टर में काम कर सकती हैं। सुबह 6 बजे से पहले या शाम 7 बजे के बाद काम पर सेफ्टी जरूरी. नाइट शिफ्ट में भी महिलाओं को काम करने की छूट।

19. मौत, गंभीर चोट होने पर अथोरिटी को सूचना देना जरूरी।

20. खतरनाक कामों में pregnant women के employment पर restriction लग सकता है।

21. Factory, contract labour और bidi-cigar work के लिए common licence की सुविधा।

22. 10 से ज्याaदा माइग्रेंट वर्कर पर खास नियम लागू होगा और एक साल में जर्नी अलाउंस भी देना होगा।

23. कॉन्ट्रैक्ट सैलरी नहीं देता है तो कंपनी जिम्मेदार होगी।

कंपनियों और कर्मचारियों पर क्या होगा असर?

सरकार का कहना है कि नए लेबर कोड से रोजगार व्यवस्था अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होगी। वहीं कई कर्मचारी संगठनों का मानना है कि लंबे वर्किंग आवर्स कर्मचारियों पर दबाव बढ़ा सकते हैं। दूसरी तरफ PF और ग्रेच्युटी बढ़ने से भविष्य की आर्थिक सुरक्षा मजबूत होने की उम्मीद है।

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