अप्रैल से लागू होगा नया आयकर कानून, सैलरी और वरिष्ठ नागरिकों के लिए बड़े बदलाव

अप्रैल से लागू होगा नया आयकर कानून, सैलरी और वरिष्ठ नागरिकों के लिए बड़े बदलाव

New Income Tax Rules: 1 अप्रैल से आयकर अधिनियम, 2025 और आयकर नियम, 2026 लागू हो रहे हैं, जो कर प्रणाली में बड़े बदलाव लाएंगे। यह नया ढांचा खासतौर पर सैलरीधारियों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है। सरकार का मकसद है नियमों को सरल बनाना, लेकिन इसके साथ ही टैक्स रिफॉर्म में ज्यादा पारदर्शिता और सटीक रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी। सैलरीधारियों के लिए सबसे बड़ा बदलाव उनकी सैलरी स्ट्रक्चर और टीडीएस कैलकुलेशन में होगा। पुराने फॉर्म 16 की जगह फॉर्म 130 आएगा, जो सैलरी इनकम, कटौती और टैक्स डिटेल्स को दिखाएगा।

कर्मचारियों को मिलेंगे ये फायदे

इसके अलावा, फॉर्म 123 में कर्मचारी को मिलने वाले पर्सक्विट्स और लाभ जैसे कंपनी कार, आवास, लोन, यात्रा, भोजन और गिफ्ट्स दर्ज होंगे। यह फॉर्म डिजिटल रूप से फॉर्म 130 से जुड़ा होगा। पर्सक्विट्स के मूल्यांकन के नियम भी स्टैंडर्ड किए गए हैं। अब इलेक्ट्रिक व्हीकल पर भी टैक्स वही लगेगा जो छोटे पेट्रोल या डीजल कारों पर लगता है।

कुछ भत्तों में राहत भी दी गई है-

मील वाउचर- ₹200 प्रति भोजन तक

बच्चों की शिक्षा भत्ता- ₹3,000 प्रति माह प्रति बच्चा

होस्टल भत्ता- ₹9,000 प्रति माह प्रति बच्चा

HRA में 50% का लाभ

मेट्रो शहरों की तरह बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी HRA में 50% लाभ मिलेगा, लेकिन इनका दावा करने के लिए कड़े नियम हैं। HRA या अन्य कटौती के लिए कर्मचारी को मकान मालिक की डिटेल्स और PAN देना अनिवार्य है अगर वार्षिक किराया ₹1 लाख से अधिक है। नौकरी बदलने पर भी अब कर्मचारियों को अपने पिछले नियोक्ता के टैक्स विकल्प की जानकारी देनी होगी, ताकि टीडीएस सही तरीके से काटा जा सके।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए ये प्रक्रिया होगी सरल

वरिष्ठ नागरिकों के लिए फॉर्म 121 पेश किया गया है, जो पुराने फॉर्म 15G और 15H को एक में मिलाता है। पेंशन और ब्याज आय वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह प्रक्रिया सरल होगी। इसके अलावा, कई लेन-देन जैसे किराया, प्रॉपर्टी पेमेंट और क्रिप्टो पर TDS के लिए एक ही यूनिफाइड फॉर्म होगा। अब PAN आधारित सिस्टम आएगा, जिससे compliances आसान होंगे। सभी करदाताओं के लिए रिपोर्टिंग ज्यादा विस्तृत होगी। बीमा प्रीमियम, कैपिटल गेन और विदेशी रेमिटेंस की जानकारी अब ट्रांजैक्शन-लेवल पर देनी होगी। संक्षेप में, कम फॉर्म, लेकिन ज्यादा डिटेल। सैलरीधारी और वरिष्ठ नागरिकों को अब अधिक सतर्क और सही जानकारी देने की जरूरत होगी।

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