Uttarakhand Aadi Mahotsav: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने आज 04 अक्टूबर 2026 रविवार को खटीमा में आयोजित ‘उत्तराखंड आदि महोत्सव’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री का स्थानीय लोगों और आयोजन से जुड़े प्रतिनिधियों ने फूल-मालाओं के साथ जोरदार स्वागत किया। महोत्सव में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी देखने को मिली।
बता दें, उत्तराखंड आदि महोत्सव में देश के 15 से अधिक राज्यों के जनजातीय कलाकार, उत्पादक एवं कारीगर प्रतिभाग कर रहे हैं। महोत्सव के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोककला, पारंपरिक हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को एक साझा मंच मिला है। महोत्सव में विभिन्न राज्यों से पहुंचे जनजातीय कलाकार अपनी पारंपरिक कला एवं संस्कृति की प्रस्तुति दे रहे हैं। वहीं, जनजातीय समुदायों से जुड़े कारीगर और उत्पादक अपने हस्तनिर्मित एवं पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे लोगों को देश की विविध जनजातीय परंपराओं और उत्पादों को करीब से जानने का अवसर मिल रहा है।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार द्वारा प्रदेश की जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उत्तराखंड आदि महोत्सव इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके जरिए जनजातीय कलाकारों, कारीगरों और उत्पादकों को अपनी प्रतिभा एवं उत्पादों को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित करने का मंच मिल रहा है। महोत्सव का उद्देश्य केवल जनजातीय कला और संस्कृति का प्रदर्शन करना ही नहीं, बल्कि जनजातीय समुदायों के पारंपरिक उत्पादों को प्रोत्साहन देते हुए उन्हें व्यापक बाजार से जोड़ने की संभावनाओं को मजबूत करना भी है। इससे स्थानीय उत्पादों की पहचान बढ़ने के साथ ही कारीगरों और उत्पादकों की आजीविका को सशक्त बनाने में भी मदद मिलेगी।
खटीमा में आयोजित इस महोत्सव में बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने विभिन्न राज्यों की जनजातीय संस्कृति, कला और पारंपरिक उत्पादों में विशेष रुचि दिखाई। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री धामी और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का उत्साहपूर्ण स्वागत किया गया। उत्तराखंड आदि महोत्सव देश की जनजातीय विविधता, संस्कृति और परंपराओं के संगम के रूप में खटीमा को एक व्यापक मंच प्रदान कर रहा है। साथ ही यह आयोजन उत्तराखंड की जनजातीय विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में सामने आया है।