India's slowest train: 5 घंटे में सिर्फ 46KM कवर, जानिए भारत की सबसे स्लो ट्रेन की कहानी

India's slowest train: 5 घंटे में सिर्फ 46KM कवर, जानिए भारत की सबसे स्लो ट्रेन की कहानी

Mettupalayam Ooty Nilgiri Passenger Train:भारतीय रेलवे की दुनिया में जहां हाई-स्पीड ट्रेनें जैसे वंदे भारत और बुलेट ट्रेन की चर्चा जोरों पर है, वहीं एक ऐसी ट्रेन भी है जो अपनी धीमी रफ्तार के लिए मशहूर है। यह है नीलगिरि माउंटेन रेलवे जिसे मेट्टुपालयम-ऊटी नीलगिरि पैसेंजर के नाम से जाना जाता है। यह ट्रेन महज 46 किलोमीटर की दूरी तय करने में पूरे 5 घंटे लगाती है, यानी औसत स्पीड करीब 9-10 किलोमीटर प्रति घंटा। लेकिन यह धीमी रफ्तार कोई कमी नहीं, बल्कि एक अनोखा आकर्षण है, जो पर्यटकों को प्रकृति की गोद में ले जाती है।

मेट्टुपालयम-ऊटी नीलगिरि ट्रेन का इतिहास

बता दें, नीलगिरि माउंटेन रेलवे तमिलनाडु के मेट्टुपालयम से शुरू होकर ऊटी (उदगमंडलम) तक जाती है। यह रूट नीलगिरि पहाड़ियों से होकर गुजरता है, जहां 208 कर्व्स, 16 सुरंगें और 250 पुल हैं। ट्रेन की शुरुआत 1899 में हुई थी, जिसे इसकी खासियत की वजह से साल 2005 में यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा मिला। 2026 में भी यह ट्रेन अपनी पुरानी विरासत को बरकरार रखते हुए चल रही है और रेलवे इसे और बेहतर बनाने के लिए रखरखाव पर जोर दे रहा है।

यह ट्रेन ब्रिटिश काल की इंजीनियरिंग का नमूना है, जो रैक-एंड-पिनियन सिस्टम पर चलती है। खड़ी चढ़ाई पर यह सिस्टम ट्रेन को गिरने से बचाता है, लेकिन रफ्तार को सीमित कर देता है। पर्यटक इसे "टॉय ट्रेन" कहते हैं, क्योंकि यह छोटी और प्यारी लगती है, लेकिन इसका सफर जीवन भर की यादें देता है।

क्यों है ये इतनी धीमी?

दरअसल, नीलगिरि की ऊंची पहाड़ियां और घुमावदार रास्ते ट्रेन को पटरी पर दौड़ने नहीं देते। यहां की ऊंचाई 326 मीटर से बढ़कर 2,203 मीटर तक पहुंच जाती है। इसके अलावा स्टीम इंजन और पुरानी पटरी इसे 10 किमी/घंटा से ज्यादा की स्पीड नहीं देती। लेकिन इससे यात्रियों को एक अलग ही अनुभव मिलता है। धीमी गति से यात्रा करने का मकसद पर्यटकों को चाय बागानों, जंगलों, झरनों और वन्यजीवों का नजारा लेने का मौका देना है। अगर तेज चलेगी, तो ये खूबसूरती छूट जाएगी।

ट्रेन में 4-5 कोच होते हैं, जिनमें फर्स्ट क्लास और सेकंड क्लास की सुविधा है। सुबह 7:10 बजे मेट्टुपालयम से चलकर दोपहर 12:00 बजे ऊटी पहुंचती है। वापसी में ऊटी से दोपहर 2:00 बजे चलकर शाम 5:45 बजे पहुंचती है। पर्यटक इसे 'स्काई ट्रेन' कहते हैं, क्योंकि रास्ते में बादलों के बीच से गुजरना जैसे लगता है।

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