PM Modi on Punjab Government: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शुक्रवार को कहा कि पंजाब में चाहे जो भी राजनीतिक व्यवस्था हो, केंद्र सरकार पंजाब के विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने जालंधर में 5,470 करोड़ रुपये से अधिक की रेल और सड़क अवसंरचना परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस दौरान PM मोदी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा ‘आज हमारा जालंधर विकास का जश्न मना रहा है। आज मुझे जिंद से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू करने का अवसर मिला। यहीं मुझे कुरुक्षेत्र में एक भव्य सिख संग्रहालय की शिलान्यास करने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ। भले ही पंजाब में भाजपा की सरकार न हो, लेकिन पंजाब के विकास के प्रति हमारी प्रतिबद्धता अटूट है। केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार राज्य की प्रगति सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।‘
स्वच्छता अभियान में भाग लेने वालों के कामं को सराहा
उन्होंने कार्यक्रम के दौरान स्वच्छता अभियान में भाग लेने के लिए निवासियों की सराहना भी की। PM मोदी ने कहा ‘मैं विशेष रूप से जालंधर के लोगों की सराहना करता हूं, जिन्होंने 'स्वच्छता के साथ स्वागत' पहल के माध्यम से इस कार्यक्रम को और भी सार्थक बनाया है। श्री गुरु रविदास जी द्वारा दिए गए सद्भाव और सामूहिक प्रयासों के संदेश को आप सभी ने साकार किया है।‘ तो वहीं, PM मोदी ने सिख नेता सरदार तेजा सिंह समुंद्री को उनकी 100वीं शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें पंजाब का महान सपूत बताया, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के दौरान राष्ट्र की सेवा और सिख हितों की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था।
केंद्र सरकार की उपलब्धियों पर क्या बोले PM मोदी?
इसके अलावा केंद्र की शासन शैली पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार बेहतर बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सेवाओं के माध्यम से नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा ‘केंद्र की भाजपा सरकार की प्राथमिकता भारत के प्रत्येक नागरिक की सेवा करना, प्रत्येक नागरिक के जीवन को आसान बनाना और नए अवसर प्रदान करना है। हम 'नागरिक भगवान के समान हैं' के मंत्र का पालन कर रहे हैं।‘ भारतीय रेलवे की दयनीय स्थिति को लेकर पिछली सरकारों की आलोचना करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा ‘भारतीय रेलवे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की सवारी है। लेकिन 2014 से पहले, कांग्रेस सरकार नई ट्रेनों की झूठी घोषणाएं करती थी और फिर निष्क्रिय बैठी रहती थी। रेलवे स्टेशनों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया था।‘