भारत के आंतरिक मामलों में कथित तौर पर विदेशी हस्तक्षेप और फंडिंग की बात सामने आई है। जिसे लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सख्ती दिखाते हुए इस मामले में दो विदेशी संस्थाओं के खिलाफ विस्तृत जांच शुरू कर दी है। इस जांच में इन दोनों संस्थाओं द्वारा 1.5 मिलियन डॉलर यानी लगभग 14.12 करोड़ रुपये के लेने-देन किए गए है। शुरुआती जांच के अनुसार, यह लेने-देन कई देशों और अलग-अलग कंपनियों के जरिए भारत से जुड़ी एक ब्रिटिश कुछ कंपनियों और व्यक्तियों तक पहुंचाई गई है। मामले सामने आने के बाद ED ने इस पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
जर्मनी से शुरू हुआ फंडिंग का खेल
ED की शुरुआती जांच की मानें तो भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने के लिए फंडिंग का खेल जर्मनी से शुरू हुआ। जिसके लिए Dr Matthias Karl Vogt Trust बनाया गया। इस दौरान करीब 10 लाख डॉलर (लगभग 9.41 करोड़ रुपये) के लेनदेन की जानकारी सामने आई। ऐसा बताया जा रहा है कि जर्मनी से यह पैसा पहले लिथुआनिया की कंपनी XBase Digital UAB को भेजा गया, जिससे जर्मन के कानूनों से बचा जा सकें। इसके बाद यही पैसा डिजिटल करेंसी और अलग-अलग कंपनियों के जरिएआगे भेजा जाता था।
इसके अलावा ED की जांच में कैरेबियन देश सेंट किट्स एंड नेविस में रजिस्टर्ड कंपनी TCC Digital Markets Ltd का नाम भी सामने आया है। जिसके जरिए करीब 10 लाख डॉलर की रकम ब्रिटेन स्थित एक कंपनी तक जा पहुंचाई जाती थी। जिसके बाद यह पैसा ब्रिटिश कंपनी के Airwallex (UK) Ltd के अकाउंट में जमा हुई। ये पैसा दो किश्तों में भेजा गया था।
इसी तरह जर्मनी, दुबई, लिथुआनिया, कनाडा, सेंट किट्स एंड नेविस और ब्रिटेन के जरिए भारत तक पैसा पहुंचाया जा रहा था। इस दौराम सभी लोगों की असली पहचान को छिपाने की कोशिश की गई। अब यह पता लगाना जरूरी है कि यह पैया भारत के किस संस्था में पहुंचाया गया।
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