Delhi Disaster management Staff Salary Hike: दिल्ली सरकार ने आपदा प्रबंधन प्रणाली को मजबूत, आधुनिक और अधिक पेशेवर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली सरकार ने दिल्ली राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीएसडीएमए) के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों, जिनमें परियोजना अधिकारी (पीओ), जिला परियोजना अधिकारी (डीपीओ) और परियोजना समन्वयक (पीसी) शामिल हैं, के वेतन में वृद्धि करने का फैसला लिया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इस फैसले से इन कर्मियों के वेतन में 100 प्रतिशत तक की वृद्धि होगी।
पिछले 16 सालों में वेतन में नहीं हुई वृद्धि
CM रेखा गुप्ता ने इसे उन अधिकारियों के साथ न्याय करने का एक लंबे समय से प्रतीक्षित कदम बताया, जो 2009 से दिल्ली की आपदा प्रबंधन प्रणाली की रीढ़ रहे हैं, लेकिन पिछले 16 सालों में उनके वेतन में एक बार भी वृद्धि नहीं हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये पद 2009 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के सहयोग से सृजित किए गए थे। तब से परियोजना अधिकारियों, जिला परियोजना अधिकारियों और परियोजना समन्वयकों का मासिक वेतन 16 सालों तक अपरिवर्तित रहा था। इस दौरान महंगाई बढ़ी, आपदा प्रबंधन की चुनौतियाँ और भी जटिल हो गईं, जिम्मेदारियाँ लगातार बढ़ती गईं और उनके काम का दायरा भी काफी बढ़ गया।
महंगाई भत्ते का भी नहीं मिला लाभ
फिर भी, परियोजना अधिकारियों और जिला परियोजना अधिकारियों का मासिक वेतन 25,000 रुपये और परियोजना समन्वयकों का 20,000 रुपये पर स्थिर रहा। उन्होंने आगे कहा कि इन पदों को कभी भी किसी नियमित सरकारी वेतन संरचना या समकक्ष वेतन श्रेणी से नहीं जोड़ा गया। परिणामस्वरूप, अन्य सरकारी कर्मचारियों की तरह, इन कर्मचारियों को न तो नियमित वेतन वृद्धि का लाभ मिला और न ही महंगाई भत्ता (DA) प्राप्त हुआ।
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कर्मचारियों के वेतन में 100 प्रतिशत तक की वृद्धि का प्रावधान
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए, स्वीकृत वेतन संरचना में इन कर्मचारियों के लिए 100 प्रतिशत तक की वृद्धि का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि यह संशोधन कोई अनुग्रह राशि नहीं है, बल्कि एक निष्पक्ष और प्रतिस्पर्धी वेतन संरचना स्थापित करने की दिशा में एक कदम है जो उनकी जिम्मेदारियों, अनुभव, तकनीकी विशेषज्ञता और वर्तमान समय की मांगों को दर्शाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये कर्मचारी नियमित कार्यालयी कार्यों से कहीं अधिक कार्य करते हैं। वे आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत महत्वपूर्ण वैधानिक दायित्वों का निर्वहन करते हैं।
उनके कार्य में जिला स्तरीय आपदा प्रबंधन योजनाएँ तैयार करना, वैज्ञानिक जोखिम आकलन करना, दिल्ली के संवेदनशील क्षेत्रों और कमजोर आबादी के बीच कमजोरियों का आकलन करना, जोखिम न्यूनीकरण रणनीतियाँ बनाना, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना और आपदाओं के दौरान आपातकालीन संचालन केंद्रों (ईओसी) का प्रबंधन करना शामिल है। साथ ही, वे एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, अग्निशमन सेवाओं, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अन्य एजेंसियों के बीच वास्तविक समय में समन्वय सुनिश्चित करते हैं। वे प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित करते हैं, बड़े पैमाने पर मॉक ड्रिल संचालित करते हैं और विभिन्न हितधारकों की क्षमता निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अन्य राज्यों के हिसाब से वेतन कम
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीएसडीएमए) के अंतर्गत इन पदों के लिए दिया जाने वाला वेतन अन्य राज्यों और यहां तक कि दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों में समान पदों के लिए दिए जाने वाले वेतन की तुलना में काफी कम है। जहां कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में समान जिम्मेदारियों को निभाने वाले अधिकारियों को लगभग 45,000 से 50,000 रुपये या उससे अधिक का वेतन मिलता है, वहीं दिल्ली सरकार के अन्य विभागों में समान स्तर के संविदात्मक पदों पर भी काफी बेहतर वेतन दिया जाता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी जैसे उच्च जोखिम वाले महानगर के लिए इस तरह की असमानता उचित नहीं है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि सरकार भविष्य में इस कैडर को और मजबूत और पेशेवर बनाने के लिए कल्याणकारी उपायों पर भी विचार करेगी, जिसमें प्रदर्शन आधारित वार्षिक वेतन वृद्धि, कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए चिकित्सा कवरेज, साथ ही प्रशिक्षण, कार्यशालाओं और क्षमता निर्माण के अवसर शामिल हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार का उद्देश्य केवल वेतन बढ़ाना नहीं है, बल्कि एक ऐसी आपदा प्रबंधन प्रणाली का निर्माण करना है जो मजबूत, अधिक आधुनिक और भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर रूप से तैयार हो।