भारत का लाल सोना, जिसके लिए तड़पता है चीन, वजह जानकर हो जाएंगे हैरान

भारत का लाल सोना, जिसके लिए तड़पता है चीन, वजह जानकर हो जाएंगे हैरान

नई दिल्ली: भारत में फसलों के साथ-साथ पेड़ की खेतों भी की जाती हैं जिससे एक अच्छा बिजनेस हो जाता हैं और पैसे भी अच्छे कमा लिए जाते  हैं, लेकिन भारत में एक ऐसा पेड़ भी हैं जिसकी लकड़ी की कीमत लाखों में हैं जिसे हम चंदन के पेड़ों के नाम से जानते हैं। वहीं लाल चंदन को भारत का लाल सोना भी कहा जाता हैं और इस सोने के लिए चीन भी तड़पता हैं।

दरअसल लाल चंदन भारत में एक खास स्थान पर ही पाया जाता है। इसकी लकड़ी का विशेष महत्व है और इसका इस्तेमाल कई चीजों में किया जाता है। लाल चंदन का वैज्ञानिक नाम टेरोकार्पस सैंटालिनस है। यह आंध्र प्रदेश के जंगलों में पाया जाता है। वहीं इस चंदन की चीन में खास मांग है। साथ ही इसके पेड़ की तस्करी भी बड़े स्तर की जाती है। बता दें कि इन चंदन के पेड़ों की सुरक्षा स्पेशल टास्क फोर्स के जवान करते हैं।

इन पेडों को आंध्र प्रदेश के चार जिलों, चित्तूर, कडप्पा, नेल्लोर, कुरनूल की शेषाचलम की पहाड़ियों में पाए जाते हैं। शेषाचलम की पहाड़ियां सवा दो लाख हेक्टेयर में फैली हैं। यहां पर पाए जाने वाले खास लाल चंदन के पेड़ों की संख्या 50 प्रतिशत तक कम हो चुकी है। साल 2015 में एनकाउंटर हुआ था जिसमें 20 तस्कर मारे गए थे। इसके अलावा बड़े पैमाने पर तस्करों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। अगर कोई तस्करी करते हुए पाया जाता है, तो उसे 11 साल की जेल हो सकती है।

इसको हिंदू धर्म में काफी पवित्र माना जाता है। चंदन की लकड़ी का पूजा में इस्तेमाल किया जाता है। सफेद चंदन में सुगंध होती, लेकिन रक्त चंदन में कोई सुगंध नहीं होती है, लेकिन यह गुणकारी होता है। औषधीय के साथ-साथ इसका इस्तेमाल सुंदरता के लिए भी होता है। रक्त चंदन की लकड़ियों की मांग मंहगे फर्नीचर और सजावट के काम के लिए भी होती है।  इसके अलावा रक्त चंदन की लकड़ी का शराब और कॉस्मेटिक्स में इस्तेमाल होता है। इंटरनेशनल मार्केट में चंदन की लकड़कियों की कीमत काफी ज्यादा है। इंटरनेशनल एग्रीमेंट के मुताबिक, लाल चंदन के पेड़ों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भारत की है।

Leave a comment