
नई दिल्ली: रोजमर्रा की जिंदगी में आपने भी देखा होगा कि आलू, सेब, बैंगन जैसे कई फल-सब्जियां कटने के बाद रंग बदलने लगती हैं। जितनी देर इसको खुले में रखा जाए उतनी ही इनका रंग गहरा होता जाता है। ऐसे में लोगों के दिमाग में आम धारण होती है कि इसमें आयन होता है जिस कारण इसका रंग बदलता है। ऐसे में वैज्ञानिकों का मानना है कि यह अवधारणा लोगो में बीच बिल्कुल गलत है। इस धारणा पर गौर करें तो अनार कटने के बाद काला हो जाना चाहिए, जिसमें अच्छी तादाद में आयरन पाया जाता है। लेकिन ऐसा नहीं होता है। तो क्या है कटे फल-सब्जियों के भूरे होने की वजह। आइये जानते हैं।
Enzymatic Browning क्या है?
एंजाइमिक ब्राउनिंग एक ऑक्सीकरण प्रतिक्रिया है जो कुछ खाद्य पदार्थों, ज्यादातर फलों और सब्जियों में होती है, जिसकी मात्रा इनमें भूरे पाए जाती है। दरअसल, हवा में ऑक्सीजन होती है और फलों की कोशिकाओं में फिनोल और एंजाइम फिनोलस पाए जाते हैं और जब ये हवा में ऑक्सीजन के संपर्क में आते हैं, तो इसका एक रिएक्शन होता है, इसमें फिनोलेज़ फिनोल को मेलेनिन में बदल देता है, जिसका रंग भूरा होता है। इसी के चलते फलों-सब्जियों का रंग भूरा होने लगता है। इस प्रक्रिया को एंजाइमेटिक ब्राउनिंग कहा जाता है। बता दें कि मेलेनिन एक पिगमेंट है, इंसान के बाल, त्वचा और आंखें के रंग के लिए भी यही पिगमेंट जिम्मेदार होता है।
ब्राउनिंग को रोकने के उपाय
• पानी में रखें: फल सब्जियों को काटकर पानी में भिगोकर रखा चाहिए। ताकि इसका इस्तेमाल किया जा सके। वहीं फलों को पानी में नहीं रखा जा सकता है क्यों वो पानी से फल बेस्वाद होने लगता है।
• डिब्बे में तुरंत कर दे बंद: फल, सब्जियों को कंटकर डिब्बे में तुरंत बंद कर दे। लेकिन इसके बाद भी थोड़ा भूरपन आ जाता है। पर हवा हर जगह है और डिब्बे में भी कुछ हवा होती है, जिससे रिएक्शन होता है।
• एल्युमिनियम फॉयल में लपेटें दें: एल्युमिनियम फॉयल में लपेटकर भी फल और सब्जियों को ब्राउन होने से कुछ हद तक रोका जा सकता है। लेकिन इससे भी पूरी तरह इसको रोकना मुमकिन नहीं है और ये महंगा भी हो सकता है।
• नींबू या सिरके का इस्तेमाल किया जा सकता है नीबू या सिरका ब्राउन करने में बाधा डालता है, जिससे फल सब्जिया ब्राउन नहीं हो पाती है। हालांकि इससे फल और सब्जी दोनों के ही स्वाद पर असर पड़ता है इसलिए आमतौर पर इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।
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