
मुंबई: 26 नवंबर की वो रात जिसने देश के कोन-कोने को हिला कर रखा दिया था। जिसे देशभर में काला दिन के नाम से भी जाना जाता हैं। हम बात कर रहे है मुंबई आतंकी हमले की। जिसमें 160 मासूम लोगों ने अपने जान से हाथ धोना पड़ा था और 300 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। दरअसल 26/11 का दिन हर भारतीय के मन में वो डर पैदा कर देता हैं जिससे हर कोई बुलाना चाहता हैं, लेकिन चाहा कर भी ये दिन बुला नहीं जा सकता क्योंकि ये दिन मुंबई का ऐसा दिन था जिसमें आतंकियों ने सारी हदें पार कर दी थी। लोगों को ढूंढ-ढूंढकरमारा जा रहा था। होटल के हरेक कमरें को खंगाला जा रहा था कि कोई व्यक्ति बच ना पाएं।
काला दिन के 14 साल पूरे
दरअसल 26/11 की रात को मुंबई की महशूश ताज होटल में आतंकी हमला हुआ। जिसमें 160 लोगों की मौत हो गई जबकि 300 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। पुलिस को रात के 09.30बजे छत्रपति शिवाजी रेलवे टर्मिनल पर गोलीबारी की जानकारी मिली। पुलिस को बताया गया कि यहां रेलवे स्टेशन के मुख्य हॉल में दो हमलावरों ने अंधाधुंध गोलीबारी की है। दोनों हमलावरों ने एके47राइफलों से 15मिनट गोलीबारी कर 52लोगों को मौत के घाट उतार दिया और 100से ज्यादा लोगों को घायल कर दिया था।
समुद्र के राह से मारी एंट्री
जांच में पता चला कि 23नवंबर को कराची से समुद्री रास्ते से एक नाव के जरिए जैश-ए-मोहम्मद के 10आतंकवादियों ने मुंबई में अपने पैर रखे और रात तकरीबन आठ बजे आतंकी कोलाबा के पास कफ परेड के मछली बाजार पर उतरे। जिसके बाद आतंकी चार समूहों में बंट गए और टैक्सी लेकर अपनी-अपनी मंजिलों की ओर बढ़ गए थे। बताया जाता है कि जब ये आतंकी मछली बाजार में उतरे थे तो इन्हें देखकर वहां के मछुआरों को शक भी हुआ था। जानकारी के अनुसार मछुआरों ने इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस के पास भी पहुंचाई, लेकिन पुलिस ने इस पर कुछ खास ध्यान नहीं दिया।
टैक्सी से की हमले की शुरूआत
वहीं करीबन एक घंटे बाद यानी रात 10.30बजे खबर आई कि विले पारले इलाके में एक टैक्सी को बम से उड़ा दिया गया है जिसमें ड्राइवर और एक यात्री मारा गया है। वहीं इसके करीब 15-20मिनट पहले बोरीबंदर से भी इसी तरह के धमाके की खबर मिली थी जिसमें एक टैक्सी ड्राइवर और दो यात्रियों की मौत होने की जानकारी मिली थी। इन हमलों में तकरीबन 15घायल हुए थे। आतंकियों की यह गोलीबारी सिर्फ शिवाजी टर्मिनल तक सीमित नहीं रही थी। दक्षिणी मुंबई का लियोपोल्ट कैफे भी उन चंद जगहों में से एक था, जो आतंकी हमले का निशाना बना था। मुंबई के नामचीन रेस्त्राओं में से एक इस कैफे में हुई गोलीबारी में मारे गए 10लोगों में कई विदेशी भी शामिल थे।
ताज होटल में खेला खूनी खेल
वहीं आतंकियों ने ताज होटल पर हमला किया उस समय होटल में 450और ओबेरॉय में 380मेहमान मौजूद थे। होटल में आतंकियों ने खूनी खेल खेला और सभी अंधाधुंध फायरिंग की लोगों को कमरों में जा-जाकर मारा जाने लगा। जैसे ही पुलिस को इस हमले की जानकारी दी गई। पुलिस और सुरक्षाबल ताज होटल पहुंचे और होटल को चारों ओर से घेर लिया जिसके बाद आतंकियों ने बचने के लिए लोगों को बंधक बना दिया। हमले की अगली सुबह यानी 27नवंबर को खबर मिली कि ताज होटल के सभी बंधकों को छुड़ा लिया गया है, लेकिन बाद में खबर मिली कि कुछ लोग अभी भी आतंकियों के कब्जे में हैं, जिनमें कई विदेशी भी शामिल हैं।
हमलों के दौरान दोनों ही होटल रैपिड एक्शन फोर्ड (आरपीएफ), मरीन कमांडो और नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) कमांडो से घिरे रहे। सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच तीन दिनों तक मुठभेड़ चलती रही थी। दो आतंकियों ने मुंबई में यहूदियों के मुख्य केंद्र नरीमन हाउस को भी अपने कब्जे में कर रखा था। वहां कई लोगों को बंधक बनाया गया। फिर एनएसजी के कमांडोज ने नरीमन हाउस पर धावा बोला और घंटों चली लड़ाई के बाद हमलावरों का सफाया किया गया लेकिन एक एनएसजी कमांडो भी शहीद हो गया था।
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