Maruti Suzuki New Plant: देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने गुजरात में बड़ा निवेश करने की घोषणा की है। कंपनी गुजरात के खोराज में 35 हजार करोड़ रुपये की लागत से नया कार निर्माण संयंत्र लगाएगी। इसे देश के ऑटोमोबाइल क्षेत्र की सबसे बड़ी निवेश योजनाओं में से एक माना जा रहा है। यह नया प्लांट करीब 1,750 एकड़ जमीन पर बनाया जाएगा। इस जमीन का आवंटन गुजरात इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (GIDC) ने किया है। परियोजना की शुरुआत के लिए कंपनी ने जमीन खरीद पर 4,960 करोड़ रुपये के शुरुआती निवेश को मंजूरी दी है।
लोगों को सीधे मिलेगा रोजगार
नए संयंत्र की सालाना उत्पादन क्षमता 10 लाख कारों की होगी। इसके शुरू होने के बाद मारुति सुजुकी की कुल उत्पादन क्षमता लगभग 34 लाख वाहन प्रति वर्ष तक पहुंच जाएगी। फिलहाल कंपनी की उत्पादन क्षमता करीब 24 लाख वाहन सालाना है। वर्ष 2025 में कंपनी ने 22.55 लाख से अधिक वाहनों का उत्पादन कर नया रिकॉर्ड बनाया था। इस परियोजना से गुजरात में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। राज्य सरकार के अनुसार, इस प्लांट से 12 हजार से अधिक लोगों को सीधे रोजगार मिलेगा। इसके अलावा ऑटो पार्ट्स, ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स, सर्विस और अन्य सहायक उद्योगों में भी हजारों नए रोजगार बनने की उम्मीद है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस निवेश का फायदा छोटे और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को भी मिलेगा। ऑटोमोबाइल सप्लाई चेन के विस्तार से स्थानीय कारोबार बढ़ेगा और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। गुजरात पहले से ही देश का प्रमुख ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब है। यहां टाटा मोटर्स, एमजी मोटर इंडिया और होंडा कार्स इंडिया जैसी बड़ी कंपनियां काम कर रही हैं। इसके अलावा बॉश, मैग्ना इंटरनेशनल और मदरसन जैसी ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनियां भी राज्य में मौजूद हैं।
औद्योगिक विकास को मिलेगी नई गति
मारुति सुजुकी का नया प्लांट गुजरात के औद्योगिक विकास को नई गति देगा। साथ ही भारत को वैश्विक ऑटोमोबाइल उत्पादन और निर्यात केंद्र बनाने में भी मदद करेगा। कंपनी आने वाले समय में अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, मध्य पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे देशों में कारों के निर्यात को बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह परियोजना केवल एक नया कारखाना नहीं है, बल्कि गुजरात के औद्योगिक विकास का नया अध्याय साबित हो सकती है। इससे निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर बनेंगे और भारत की 'मेक इन इंडिया' पहल को भी मजबूती मिलेगी।
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