
Mahakumbh Stampede: प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में आज मौनी अमावस्या के दिन दूसरा शाही स्नान चल रहा है। इस शाही स्नान के पहले रात करीब 1 बजे कुंभ में भगदड़ मच गई। इस हादसे में कई लोग घायल हुए तो वहीं बहुत से लोगों ने जान गंवाई। कुंभ में हुई इस भगदड़ की तस्वीरें विचलित कर देने वाली हैं। तस्वीरों में देखा जा सकता है कि घटनास्थल परबैगऔरजूते-चप्पल के साथ अन्य सामान इधर-उधर पड़े हुए हैं। इस घटना ने 71 साल पहले हुए महाकुंभ की उस घटना की याद दिलाई हैजिसमें 800 से ज्यादा लोग ने अपनी जान गंवाई थी।
क्या है कहानी प्रथम महाकुंभ की
बता दें, पहला महाकुंभ प्रयागराज में ही आयोजित हुआ था। प्रयागराज जिसका नाम पहले इलाहाबाद हुआ करता था। साल 1954 में आयोजित इस महाकुंभ में 3 फरवरी को मौनी अमावस्या थी। इस कुंभ में देश के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी वहां मौजूद थे। माना जाता है कि उन्हें देखने के लिए लाखों की संख्या में लोगों के बीच भगदड़ मची। जिसके कारण उस दौरान भी लोगों ने जान गंवाई थी। हालांकि उस समय की अखबारों को देखा जाए तो कहानी कुछ अलग थी।
भगदड़ के कारण गंगा में समाए लोग
जानकारी के अनुसार, 3 फरवरी 1954 को शाही स्नान के दिन अखाड़ों का जुलूस देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग संगम तट पर मौजूद थे। जुलूस के कारण कुंभ में धीरे-धीरे ये भीड़ बढने लगी। बताया जाता है कि जब लोगों ने जुलूस के बीच से निकलने की कोशिश तो नागा साधुओं ने अपने त्रिशूल श्रद्धालुओं की ओर मोड़ दिए थे। जिसके कारण भगदड़ मच गई थी। इस अफरातफरी में कुछ लोग दबकर मर गए तो वहीं कुछ लोग गंगा में समा गए थे।इस हादसे में 800 से ज्यादा लोगों के मरने का दावा किया गया था। 2000 से ज्यादा लोगों के घायल होने की भी बात सामने आई थी।
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