MP News: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर एक रिटायर्ड महिला लैब टेक्नीशियन और उनके बेटे को निशाना बनाकर 1 करोड़ 57 लाख 90 हजार रुपये की ठगी को अंजाम दिया। इस मामले में पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, 69 वर्षीय मीनाक्षी नाखरे, जो स्वास्थ्य विभाग से रिटायर्ड लैब टेक्नीशियन हैं और पाटनकर साहब का बाड़ा क्षेत्र की निवासी हैं, मई महीने में एक कॉल आने के बाद साइबर ठगों के जाल में फंस गईं। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली टेलीकॉम विभाग का अधिकारी बताया और दावा किया कि उनके बैंक खाते में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा पैसा आया है। जब मीनाक्षी नाखरे ने आरोपों को गलत बताया तो ठगों ने उनके खाते से जुड़ी कुछ जानकारियां देकर उनका भरोसा जीत लिया। इसके बाद उन्हें एंड्रॉयड मोबाइल पर बात करने के लिए मजबूर किया गया। चूंकि वह सामान्य की-पैड मोबाइल का इस्तेमाल करती थीं, इसलिए उन्होंने अपने बेटे अनुभव से एंड्रॉयड फोन लिया।
एंड्रॉयड फोन पर कथित अधिकारियों ने उनकी बात सीबीआई और आरबीआई के नाम पर खुद को अधिकारी बताने वाले अन्य लोगों से कराई। वीडियो कॉल के दौरान स्क्रीन पर दिल्ली पुलिस का लोगो भी दिखाई देता था, जिससे पीड़िता को लगा कि जांच वास्तव में सरकारी एजेंसियां कर रही हैं।ठगों ने मीनाक्षी और उनके बेटे को घर से बाहर नहीं निकलने के निर्देश दिए और कहा कि जांच पूरी होने के बाद उन्हें निर्दोष घोषित कर एनओसी जारी कर दी जाएगी। इसी डर और दबाव में आकर पीड़िता ने ग्वालियर के अपने बैंक खातों से अलग-अलग किस्तों में कुल 1 करोड़ 57 लाख 90 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।
अधिकारियों ने की अपील
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह रकम पश्चिम बंगाल, केरल, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के विभिन्न बैंक खातों में भेजी गई थी। करीब एक महीने तक ठगों के संपर्क में रहने के बाद अचानक उनका फोन और मैसेज आना बंद हो गया। कई बार संपर्क करने की कोशिश के बावजूद जब कोई जवाब नहीं मिला, तब पीड़ित परिवार को ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद मीनाक्षी नाखरे ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। क्राइम ब्रांच थाना पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जिन बैंक खातों में रकम ट्रांसफर की गई है, उन्हें फ्रीज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वहीं आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस की विशेष टीमें रवाना कर दी गई हैं। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, डिजिटल अरेस्ट, मनी लॉन्ड्रिंग जांच या सरकारी एजेंसी के नाम पर आने वाले दबावपूर्ण कॉल पर भरोसा न करें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन या स्थानीय पुलिस से संपर्क करें।