
Why is post mortem done: पोस्टमार्टम...किसी भी शख्स की मौत होती है और उसको जब अस्पताल में ले जाया जाता है तो उसे समय शख्स का पोस्टमार्टम किया जाता है। पोस्टमार्टम से उस शख्स की मौत किन कारणों से हुई इस बात का पता चलता है। लेकिन वास्तव में पोस्टमार्टम क्या है। चलिए आपको आज बताते है।
क्यों किया जाता है पोस्टमार्टम
आमतौर पर पोस्टमार्टम किसी व्यक्ति की मौत के कारणों को जानने के लिए किया जाता है। यानी पोस्टमार्टम में शव की जांच पड़ताल का काम है। शव का पोस्टमार्टम या ऑटोप्सी मौत का कारण, किसी बीमारी का दिवंगत के शरीर पर प्रभाव और बीमारी के शरीर पर काम करने की प्रक्रिया को जानने के लिए किया जाता है।
दरअसल ऑटोप्सी (Autopsy) शब्द ग्रीक लफ्ज़ ऑटोपसिआ से लिया हुआ है। इसका अर्थ होता है, 'अपने लिए देखना/जानना'।माना जाता है कि इसकी शुरुआत अलेक्सेंडर या सिकंदर के दरबार के चिकिस्तकों हेरोफिलुस और एरासिस्ट्रॉट्स ने 300ईसा पूर्व सबसे पहली बार पोस्टमार्टम किया था। उसके बाद लगभग 200ईसा पूर्व ग्रीक फिजिशियन गैलेन पहले व्यक्ति थे जिन्होंने मृतक के शरीर के ज़रिये बीमारी और उससे शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव का पता लगाया था।
क्या होती है फोरेंसिक ऑटोप्सी या पोस्टमार्टम
फोरेंसिक या लीगल ऑटोप्सी (Sonali Phogat Autopsy) विशेष तरह की होती हैं। इसमें केवल मृत्यु के कारणों का पता ही नहीं लगाया जाता है बल्कि सारे तथ्यों को जानने की कोशिश की जाती है। ज़रूरी बात यह कि शव को खोलते ही मौत के कारण का पता नहीं लगता है। इसे पता करने के लिए पोस्टमार्टम एक्सपर्ट छोटी-छोटी जानकारियों को इकट्ठा करते हैं।
मसलन आस-पास की अबोहवा, मृत्यु का वक़्त, परिस्थिति की जानकारी जुटाई जाती है। इसके साथ ही तमाम तरह के मेजरमेन्ट्स का ख़याल भी रखा जाता है। शव को खोलने के बाद अप्रत्याशित चोट की स्टडी की जाती है और संभावित कारणों को डॉक्यूमेंट किया जाता है।
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