
Big Announcement For Kig Worker In Union Budget: मोदी सरकार ने आम बजट में किग कामगार के लिए बड़ा ऐलान किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि मोदी सरकार एक करोड़ किग वर्कर्स की पहचान पत्र बनाएगी। इन सभी का नाम ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण कराया जाएगा। सीतारमण ने कहा कि शहरी श्रमिकों की सामाजिक-आर्थिक उत्थान के उद्देशय से यह योजना लागू की जाएगी।
बता दें कि मोदी सरकार के इस फैसले से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों , अमेजन, फ्लिपकार्ट, जोमैटो , स्विगी जैसी ई-कॉमर्स में पार्ट टाइम जॉब करने वाले डिलीवरी बॉय और ओला-उबर के ड्राईवर को बड़ा फायदा होगा।
किग कामगार को क्या-क्या होंगे?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर गिग वर्कर न्यू एज सेवा अर्थव्यवस्था में अत्यधिक गतिशीलता लाते हैं। उनके योगदान को स्वीकार करते हुए हमारी सरकार ई-श्रम पोर्टल पर उनके पहचान पत्र और पंजीकरण की सुविधा प्रदान करेगी। इसके अलावा भी किग श्रमिकों को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) के तहत स्वास्थ्य सेवा मिलेगी। इससे लगभग 1 करोड़ श्रमिकों को लाभ पहुंचेगा।
रेहड़ी-पटरी पर काम करने वालों की मौज
आपको बता दें कि अमेरिका की तरह भारत में ऐसे मजदूरों को ईएसआई के साथ-साथ एक्सीडेंटेल बीमा का लाभ मिलेगा। पिछले साल श्रम मंत्रालय ने एक ड्राफ्ट तैयार कर फाइनेंशियल अप्रूवल के लिए वित्त मंत्रालय के पास भेजा था। किग प्लेटफॉर्म लेबर एक्ट आने के बाद इन श्रमिकों को कई तरह के लाभ मिलने शुरू हो जाएंगे। उनके काम करने के घंटे भी तय कर दिए जाएंगे।
कौन होते हैं गिग वर्कर ?
किग वर्कर एक तरह से अस्थाई कर्मी होते हैं। जो किसी संस्थान, कंपनी या प्रतिष्ठान में शॉर्ट टर्म के लिए अस्थाई तौर पर काम करने वाले लोगों को किग वर्कर कहा जाता है। थर्ड पार्टी जॉब करने वाले लोग भी इसी श्रेणी में आते हैं। क्योंकि, वह काम किसी और कंपनी में करते हैं लेकिन, भुगतान उन्हें किसी और कंपनी से होता है। यानी ठेके पर जिनसे काम लिया जाता है या फिर एक निश्चित समय के लिए अनुबंध पर काम करते हैं। वे किग वर्कर कहलाते हैं।
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