महिलाओं के मुकाबले पुरुषों पर है ज्यादा आत्महत्या करने का संकट, रिर्पोट में हुआ खुलासा

महिलाओं के मुकाबले पुरुषों पर है ज्यादा आत्महत्या करने का संकट, रिर्पोट में हुआ खुलासा

नई दिल्ली: आज अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस है। हर साल ये दिन 19 नवंबर को मनाया जाता है, भारत में इस दिन को 2007 से मनाया जा रहा है। इस दिन को मनाने की सिर्फ एक ही वजह है और पुरुषों से जुड़े मुद्दे भी समाज उठाए जा सकें और उन्हें लेकर जागरूकता बढ़ाई जा सके। और पुरुषों से जुड़े मुद्दों में सबसे अहम मुद्दा है 'आत्महत्या', क्योंकि दुनियाभर के आंकड़े बताते हैं कि सुसाइड करने में पुरुष महिलाओं से आगे हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, दुनिया में हर साल 7 लाख से ज्यादा लोग सुसाइड करते हैं। यानी, जितने लोग मलेरिया, ब्रेस्ट कैंसर, एचआईवी से नहीं मरते उससे ज्यादा आत्महत्या करने से हर साल मरते है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि 15 से 29 साल के युवाओं में मौत की चौथी सबसे बड़ी वजह सुसाइड है। पुरूष महिलाओं के तरह किसी से अपना दुख शेयर नहीं कर पाते और आत्महत्या का रास्ता चुन लेता है।

बीते दस साल में 15 से 29 साल के पुरूषो में आत्महत्या के मामले 200 प्रतिशत तक बढ़े हैं। इसके तेजी से बढ़ने के पीछे अब तक केवल आर्थिक कारणों को जिम्मेदार माना जाता है, लेकिन कई रिसर्चो से पता चला है कि फैमिली प्रॉब्लम और बीमारी (एड्स, कैंसर आदि) से तंग आकर लोग सबसे ज्यादा आत्महत्या करते हैं। पिछले साल 33% सुसाइड फैमिली प्रॉब्लम और 19% बीमारी की वजह से हुई। हर व्यक्ति के आत्महत्या करने की अलग-अलग वजह होती है। एक्सपर्ट का मानना है कि डिप्रेशन, तनाव की वजह से आत्महत्या करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।इसके अलावा जब व्यक्ति के पास अपनी परेशानी से बचने के लिए कोई रास्ता नहीं बचता तो वह आत्महत्या कर लेता है।

रिपोर्ट के अनुसार आत्महत्या करने वाले पुरुषों में से 57 फीसदी से ज्यादा ऐसे थे जो या तो दिहाड़ी मजदूर थे या अपना खुद का कुछ काम करते थे या फिर बेरोजगार थे। यानी, हो सकता है कि इनकी आत्महत्या करने की वजह आर्थिक तंगी हो। 2011 में हुए रिसर्च में पता लगाने कि कोशिश की गई है कि महिलाओं के मुकाबले पुरूष ज्यादा सुसाइट क्यों करते है? इस रिसर्च में सामने आया था कि समाज में पुरुषों को अक्सर ताकतवर और मजबूत समझा जाता है और इस वजह से वो अपने डिप्रेशन या सुसाइल फीलिंग को दूसरे से सांझा नहीं कर पाते अखिर में थक हार के वो आत्महत्या जैसा बडा कदम उठा लेते है। एक स्टडी में बताया गया था कि बेरोजगारी के समय मर्दों के सुसाइड करने का रिस्क बढ़ जाता है, क्योंकि उन्हें ऐसा लगता है कि समाज और परिवार को जो उनसे उम्मीद है, उस पर वो खरे नहीं उतर पा रहे हैं ।

क्या आत्महत्या की कोशिश करना अपराध है?

आत्माहत्या एक बहुत बड़ा अपराध है। सुसाइट की कोशिश करना आईपीसी की धारी 309 के तहत अपराध है। ऐसा करने पर 1 साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। एनसीआरबी की रिपोर्ट बताती है कि 2021 में आत्महत्या की कोशिश करने के 1,863 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2020 में 1,685 मामले दर्ज हुए थे। उससे पहले 2019 में 1,638 मामले सामने आए थे। बता दें कि आत्माहत्या के मामले हर साल बढ़ते नज़र आ रहे है। आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है। अगर आपको भी कोई परेशानी है तो दोस्तों-रिश्तेदारों से बात करें या डॉक्टरी सलाह लें। सही समय पर सही सलाह के द्वारा आप अपनी समस्या से निकल सकते है।

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