Interesting Stories Related To Rishi Kapoor: जानें ऋषि कपूर से जुड़े कुछ ऐसे किस्से जो उनके कद्रदानों के जेहन में हमेशा तरोताजा रहेंगे

Interesting Stories Related To Rishi Kapoor: जानें ऋषि कपूर से जुड़े कुछ ऐसे किस्से जो उनके कद्रदानों के जेहन में हमेशा तरोताजा रहेंगे

मुंबई : दोस्तो! कहते हैं एक कलाकार कभी मरता नहीं हैं. समय के साथ भले ही वह दुनिया को अलविदा कह जाए पर उसकी अदाकारी कभी नहीं मरती. ऋषि कपूर अब हमारे बीच भले न हों लेकिन एक बेहतरीन कलाकार के तौर पर वह सिने जगत के साथ ही आम दर्शकों के जेहन में हमेशा जिंदा रहेंगे. क्या आपको पता है कि ऋषि एक जिंदादिल इंसान थे. कहते हैं उनकी मौत से चंद लम्हों पहले भी वह डाॅक्टरों को हंसाते रहे. बस यही तो एक कलाकार की जिंदादिली है. उसने जिस मासूमियत और संजीदगी से पर्दे पर जो चरित्र निभाया असल जिंदगी में भी ऐसे ही बिंदास और हंसमुख इंसान थे ऋषि कपूर. आइए जानते हैं ऋषि कपूर के जीवन से जुड़ी कुछ ऐसी यादें जो हमेशा उनके चाहने वालों के दिलोदिमाग पर तरोताजा रहेंगी.
 
कुछ दिनों पहले ऋषि ने एक साक्षात्कार में कहा था कि अब मैं बहुत बेहतर महसूस कर रहा हूं और कोई भी काम कर सकता हूं. सोच रहा हूं कि एक्टिंग दोबारा कब शुरू करूं. पता नहीं लोगों को अब मेरा काम पसंद आएगा भी या नहीं. न्यूयॉर्क में मुझे कई बार खून चढ़ाया गया था. तब मैंने नीतू से कहा था कि उम्मीद करता हूं कि नए खून के बावजूद मैं एक्टिंग नहीं भूलूंगा. बता दें कि ऋषि खूब सिगरेट पीया करते थे लेकिन बेटी ने एक बार ऐसा कुछ कह दिया कि उन्होंने हमेशा के लिए सिगरेट छोड़ दी. वह अपनी बायोग्राफी कई खास लम्हों का जिक्र करते हैं. वह कहते हैं कि जब उनकी बेटी रिद्धिमा ने उनसे कहा कि मुझसे आपको सुबह-सुबह किस नहीं होगा, क्योंकि आपके मुंह से बदबू आती है. बस फिर क्या था ऋषि ने सिगरेट छोड़ दी. वह एक जगह लिखते हैं कि रविवार को उनका ऑफ रहता था और हर साल एक महीने के लिए बच्चों को बाहर घूमने ले जाते थे. इसके अलावा, आउटडोर शूट पर भी बच्चे उनके साथ होते थे. 
 
जब संजू को समझाया
 
ऋषि की मानें तो वे परिरवार को पूरा अटेंशन देते थे. फिर चाहे वर्क शेड्यूल कितना भी व्यस्त क्यों न हो. वे लिखते हैं कि जब वे आउटडोर शूट पर जाते थे तो उनके साथ सारे नौकर-चाकर भी होते थे. फिर चाहे वह कुक हो या मेड. हमारे साथ वीडियो कैमरा, वीडियो प्लेयर और एक टीवी सेट भी होता था, ताकि बेटी खाना खाते समय कार्टून देख सके. टीना मुनीम के बारे में कहते हैं कि उन्हेांने स्क्रीन पर अलग आकर्षण बनाया था. मैंने उनके जैसी किसी और मॉर्डन-खूबसूरत को-स्टार के साथ कभी काम नहीं किया. लोग कहते थे कि हम स्क्रीन पर अच्छे लगते हैं. कर्ज में हमने साथ काम किया, जो मेरे दिल के बेहद करीब है. किताब में ऋषि लिखते हैं, गुलशन ने मुझे बाद में बताया कि फिल्म रॉकी की शूटिंग के दौरान संजय, नीतू के घर झगड़ने पहुंच गए थे. लेकिन नीतू ने इस सिचुएशन को बेहतरीन तरीके से संभाला. उन्होंने शांतिपूर्वक संजू को समझाया कि वे बातें महज अफवाहें हैं. नीतू ने उनसे कहा था कि टीना और चिंटू के बीच ऐसा कुछ नहीं है. वे सिर्फ अच्छे दोस्त हैं.
 
अमिताभ के बारे में ये कहा
 
वे कहते हैं कि उनकी कामयाबी का सीक्रेट बस यही है कि वे काम को लेकर काफी जूनूनी रहे. मेरे ख्याल से पैशन ही आपको सफलता दिलाता है. उन दिनों अमिताभ और मेरे बीच एक अनकहा तनाव रहा करता था. हमने कभी उसे सुलझाने की कोशिश नहीं की और वो खत्म भी हो गया. इसके बाद हमने साथ में अमर अकबर एंथोनी की और फिल्म के बाद तो गहरी दोस्ती हो गई. जीतेंद्र से तो मेरे रिलेशन अच्छे थे, लेकिन अमिताभ और मेरे संबंधों में तल्खी थी. मैं उनके साथ अनकम्फर्टेबल महसूस करता था. वो मुझसे 10 साल बड़े थे, लेकिन मैं उन्हें अमितजी की जगह अमिताभ ही बुलाता था. शायद मैं बेवकूफ था. कभी-कभी की शूटिंग के वक्त तो न मैं उनसे बात करता था और न ही वे. 
 
बता दें कि ऋषि कपूर अपने पिता राज कपूर को पिता से ज्यादा गुरु मानते थे. उन्होंने अपनी ऑटोबायोग्राफी के लॉन्चिंग के दौरान यह खुलासा किया था. उन्होंने कहा था कि लोग कहते हैं कि मैं मुंह में चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुआ. हां मैं मानता हूं, लेकिन इसमें मेरी गलती क्या है? मुझे बॉबी फिल्म से काफी शोहरत और सक्सेस मिली. लेकिन मैंने भी अलग-अलग तरह से स्ट्रगल को फेस किया है. मेरे लिए राज कपूर सिर्फ मेरे पिता नहीं, बल्कि गुरू हैं. मैं आज जो कुछ भी हूं उन्हीं की बदौलत हूं.
 
 

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