
नई दिल्ली: भारत में नोटबंदी के 6 साल बाद एक बार फिर करेंसी की चर्चा शुरू हो गई है। तब 500 और 1000 के नोट चलन से बाहर हो गए थे और नया नोट 2000 रुपये का आया था। अब 24 घंटे से लोग अपने पर्स में रखे नोटों को करीब फिर करीब से देख रहे हैं।
बता दें हाल ही में केजरीवाल का नोटों को लेकर एक बयान सामने आया है। जिसमें दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने मांग की है कि करेंसी नोटों पर भगवान गणेश और लक्ष्मी के चित्र छापे जाएं तो देश की तरक्की होगी। उनका मानना है कि करेंसी नोटों पर देवताओं के चित्र प्रकाशित करने से लोगों को दैवीय आशीर्वाद मिलेगा, जिससे आर्थिक लाभ होगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि इंडोनेशिया की आबादी में 85 फ़ीसदी जनता मुस्लिम है और मात्र दो फ़ीसदी जनता हिंदू है, फिर भी गणेश जी की तस्वीर उनकी करेंसी पर है।
इंडोनेशियाई नोट पर हिंदू देवता की तस्वीर क्यों?
बता दें, इंडोनेशिया ने ये नोट साल 1998 में एक ख़ास थीम के तहत जारी किया था और अब ये नोट चलन में नहीं है। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल होती इस नोट की तस्वीर को ध्यान से देखें तो इसमें एक तरफ़ हिंदू देवता गणेश और एक शख़्स की तस्वीर नज़र आती है।वहीं, दूसरी तरफ़ पढ़ाई करते कुछ बच्चों की तस्वीर नज़र आती है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार साल 1998 में जारी किए गए इस करेंसी नोट का थीम शिक्षा थी। गणेशजी को इंडोनेशिया में कला, बुद्धि और शिक्षा का भगवान माना जाता है। यहां के कई शैक्षणिक संस्थानों में भी गणेश जी की तस्वीर का इस्तेमाल होता है। हालांकि, इंडोनेशिया में अभी भी एक करेंसी नोट सर्कुलेशन में है जिसमें इंडोनेशियाई द्वीप बाली में स्थित एक हिंदू मंदिर की तस्वीर है। जो पचास हजार को नोट अब भी है।
इंडोनेशिया में गणेशजी की क्यों इतनी मान्याता?
इंडोनेशिया भले ही मुस्लिम देश हो और यहां भले ही हिंदू मात्र दो प्रतिशत हों लेकिन बाली द्वीप की 90 फ़ीसदी आबादी हिंदू है और हिंदू धर्म का विस्तार सारे इंडोनेशिया में है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 1960 और 1970 के दशक में जावा द्वीप पर हज़ारों लोगों ने हिंदू धर्म अपनाया था। इंडोनेशिया के समाज और संस्कृति पर नज़र डालें तो कई क्षेत्रों में इंडोनेशिया के हिंदू इतिहास की झलक मिलती है। इंडोनेशिया में अतीत में कई हिंदू राजवंशों का शासन भी रहा है। सातवीं से 16वीं सदी के बीच इंडोनेशिया के अधिकतर हिस्से पर हिंदू-बौद्ध राजवंशों का शासन रहा है। इनमें मजापहित साम्राज्य और श्री विजय साम्राज्य सबसे बड़े थे। इनके दौर में हिंदू धर्म इंडोनेशियाई द्वीपों में फला-फूला। इस साम्राज्य में भी हिंदू, बौद्ध, एनिमिज़्म समेत कई धर्म फले फूले। लेकिन धार्मिक भाषा संस्कृत ही रही। इससे पहले विजय साम्राज्य का दौर सातवीं से 12वीं सदी तक रहा जिसकी मुख्य भाषाएं संस्कृत और ओल्ड मलय रही थीं। मौजूदा दौर में भी इंडोनेशिया के इतिहास में पनपी लोककथाओं और प्रतीकों का असर देखा जाता है।
Leave a comment