
नई दिल्ली: भारत की लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था में सबसे बड़ा और प्रतिष्ठित पद राष्ट्रपति का होता है,जिस के लिए भारत में 18 जुलाई 2022 को चुनाव होने वाले हैं।देश को अब तक एक से बढ़कर एक राष्ट्रपति मिले हैं,लेकिन क्या आपको इस बात की जानकारी हैं कि भारत के ऐसे कौन से राष्ट्रपति थे जिन्होंने अपने वेतन का 75 फीसदी हिस्सा भारतीय खजाने में जमा करवा दिया था।
इस लिस्ट में सबसे पहला नाम हमारे देश के पहले महामहीम राजेंद्र प्रसाद का आता हैं। इसके बाद राष्ट्रपति डॉक्टर राधाकृष्णन और नीलम संजीव रेड्डी का नाम इस लिस्ट में शामिल हैं।हमारे पहले महामहीम का जन्म 3 दिसंबर 1884 में हुआ था और ये वो वक्त था जब ब्रिटिश सरकार ने हमारे देश में पुरी तरह अपने पैरों को फैला लिया था। बता दें कि डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने राष्ट्रपति का पद दो बार संभाला था।जब वो पहले राष्ट्रपति बने थे उस समय राष्ट्रपति का वेतन केवल 10 हजार रूपये प्रति महीना हुआ करता था। उस समय महामहीम अपने वेतन का 50 फीसदी हिस्सा लिया करते थे,लेकिन बाद में वो केवल 25 फीसदी हिस्सा ही लिया करते थे।
राजेंद्र प्रसाद एक ऐसे राष्ट्रपति थे जिन्होने अपने पूरे कार्यकाल में व्यक्तिगत स्टाफ के तौर पर केवल एक ही इंसान को रखा था। उन्हें धरती से जुड़ा हुआ इंसान कहा जाता था क्योंकि वो अपना खाना भी जमीन पर बैठकर खाया करते थे।इतना ही नहीं उनका खाना बनाने के लिए किसी बावरची को नहीं रखा गया था बल्कि उनकी पत्नी उनका खाना बनाया करती थी। अब अगले राष्ट्रपति की बात करें तो उनका नाम नीलम संजीव रेड्डी था।नीलम संजीव रेड्डी ने देश के छठे राष्ट्रपति का पद संभाला था। वो एक ऐसे राष्ट्रपति थे जिन्होंने अपने वेतन का 70 प्रतिशत हिस्सा सरकारी खजाने में जमा करवा दिया करते थे।
इसके बाद देश के दूसरे राष्ट्रपति की बात करें तो डॉक्टर राधाकृष्णन का कार्यकाल 1962 से 1967 तक का रहा था। डॉक्टर राधाकृष्णन के कर्यकाल में ही देश को दो युद्धों का सामना करना पड़ा था।बता दें कि राष्ट्रपति राधाकृष्णन भी अपने वेतन का 75 प्रतिशत हिस्सा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में जमा करवा दिया करते था। उन्हें अपना जीवन साधारण तरीके से जीना पसंद था।
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