
Lok Sabha Speaker: 18वीं लोकसभा के स्पीकर को लेकर NDA और विपक्ष INDIA के बीच टकराव जारी है। स्पीकर के चयन को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बन सकी। जिसके बाद NDA के तरफ से ओम बिरला को दूसरी बार स्पीकर पद का दावेदार बनाया गया है। वहीं INDIA की ओर से भी के, सुरेश को उम्मीदवार बनाया गया है। हालांकि, ये 48 साल बाद ऐसा पहली बार होने जा रहा है जब स्पीकर का चयन चुनाव के जरिए होगा। वहीं TMC का आरोप है कि कांग्रेस ने फैसला लेते वक्त उनसे सलाह-मशवरा नहीं किया है।
जानकारी के लिए बता दे कि ओम बिरला राजस्थान के कोटा से सांसद चुने गए हैं। जबकि के सुरेश केरल के मवेलिकारा से चुनाव जीते है। सुरेश 8 बार के सांसद रह चुके है। दोनों ने दोपहर 12 बजे से पहले नामांकन दाखिल किया है। वोटिंग 26 जून को सूबह 11 बजे से शुरू होनी है।
चुनाव का प्रोसेस क्या है?
लोकसभा स्पीकर चुनने के लिए सबसे पहले प्रस्ताव पेश किया जाता है। सत्ता पक्ष की तरफ से उम्मीदवार घोषित होने के बाद उसका नाम आमतौर पर प्रधानमंत्री या संसदीय कार्य मंत्री द्वारा प्रस्तावित किया जाता है। लोकसभा सचिवालय को जिस उम्मीदवार का पहले प्रस्ताव मिलता है, उसका प्रस्ताव भी सदन में पहले पेश किया जाता है। विपक्षी सदस्यों की तरफ से मत विभाजन की मांग की जाएगी। संभव है कि ध्वनि मत से मतदान कराया जा सकता है। लेकिन अगर विपक्ष राजी नहीं हुआ तो फिर पेपर स्लिप के जरिए चुनाव होंगे। क्योंकि नई लोकसभा में अभी सीटें आवंटित किए जाने की प्रक्रिया चल रही है और इलक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम भी चालू नहीं है, इसलिए सदस्यों को पर्चियां दी जाएंगी और उसी के जरिए मतदान होगा।
पहले प्रस्ताव का महत्व
अगर पहला प्रस्ताव पारित हो जाता है यानी 50 फीसदी से ज्यादा बहुमत मिल जाता है तो दूसरे प्रस्ताव को पेश करने की नौबत नहीं आती है। यानी एनडीए समर्थित ओम बिरला का प्रस्ताव पास हो जाता है तो वे स्पीकर घोषित कर दिए जाएंगे।
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