कागज को कैसे किया जाता है तैयार, यहां पढ़े पूरी खबर

कागज को कैसे किया जाता है तैयार, यहां पढ़े पूरी खबर

नई दिल्ली: बचपन से लेकर बड़े होने तक कागज हमेशा हमारे काम आता है, लेकिन कभी आपने कागज के बारे में सोचा है कि वह कैसे बनता है किस पेड़ से बनता और इससे बनाने की क्या प्रक्रिया होती है। ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम की कागज बनाने की क्या प्रक्रिया है तो चलिए आज हम आपको कागज से जुड़ी सभी जानकारी देते है।

दरअसल कागज बनाने के लिए मुख्य तौर पर सेल्यूलोज का उपयोग किया जाता है। सेल्यूलोज एक चिपचिपा पदार्थ है जो पेड़-पौधों की लकड़ियों में मौजूद रहता है। कागज़ के निर्माण के लिए सेल्यूलोज के रेशों को आपस में जोड़कर एक पतली परत तैयार की जाती है। वहीं कागज़ की गुणवत्ता सेल्यूलोज की शुद्धता पर निर्भर करती है। जितना शुद्ध सेल्यूलोजहोगा, कागज भी उतनी ही उच्च गुणवत्ता वाला प्राप्त होगा। रुई में शुद्ध रूप में सेल्यूलोज पाया जाता है, जिससे कागज बनाया जा सकता है लेकिन यह काफी महंगा पड़ता है इसलिए इसका इस्तेमाल कपड़े बनाने के लिए अधिक किया जाता है।

कागज बनाने की प्रक्रिया

सबसे पहले  कागज बनाने के लिए पेड़ों का चयन किया जाता है वहीं इस पेड़ को चुना जाता है जिसकी लकड़ी में रेशों की मात्रा अधिक होती है।पेड़ों का चयन होने के बाद इनकी लकड़ी को गोल टुकड़ों में काटा जाता है और छिलके को हटाया जाता है। इसके बाद उन्हें फैक्ट्री में भेज दिया जाता है। इसके बाद पल्प तैयार किया जाता है। पल्प तैयार करने के लिए यांत्रिक विधि और रासायनिक विधि का प्रयोग किया जाता है।

यांत्रिक विधि में केमिकल की जरूरत नहीं पड़ती है। उसके बाद मैकेनिकल मेथड के अंदर लकड़ी के गोल टुकड़ों या छोटे टुकड़ो को इस्तेमाल में लिया जाता है। इसके बाद रेशों को अलग किया जाता है। वहीं चमक बढ़ाने के लिए पल्पको ब्लीच भी किया जा सकता है, लेकिन लिग्निन मौजूद रहने की वजह से इसमें पीलापन बरकरार रहता है। इस तरह कागज तैयार करने पर कागजनरम और अधिक अपारदर्शिता वाला होता है।

वहीं रासायनिक विधि में लकड़ी के छोटे टुकड़ों को भाप में पका कर सॉफ्ट किया जाता है और किसी फंसी हुई हवा को बाहर निकाला जाता है। इसके बाद इसे सोडियम हाइड्रोक्साइड और सोडियम सल्फाइडसहित एक उच्च क्षारीयघोल के साथ शामिल किया जाता है और क्रमबद्ध करनेवाला  चैम्बर में डाला जाता है।

अब इस सामग्री को उच्च दबाव के साथ 160 डिग्री सेल्सियस से 170 डिग्री सेल्सियस के बीच कुछ घंटों के लिए उबाला जाता है और अंत में फाइबरऔर एक काला तरल बच जाता है।अब इस तरल को अलग कर दिया जाता है और बचे हुए रेशों को कई तरीकों से साफ किया जाता है।केमिकल पल्प से बना कागज मैकेनिकल पल्प से बने कागज की अपेक्षा अधिक चमकदार, चिकना और उच्च गुणवत्ता वाला होता है।

पल्प तैयार होने के बाद इसे पीटना और निचौड़ना प्रक्रिया के लिए भेज दिया जाता है।यहाँ पल्पको मशीन के अंदर एक टब में रखा जाता है और beater के संपर्क में लाया जाता है।अब इसमें कई तरह की फिलर सामग्री डाली जाती है, जैसे कि चाक, मिट्टी या केमिकल जैसे टाइटेनियम ऑक्साइड।

ये योगशील कागज की अपारदर्शिता और दूसरे गुणों को बढ़ाते हैं।इसके साथ ही यहाँ आकारको भी शामिल किया जाता है। एक आकारजैसे स्टार्च, कागज का स्याही के साथ react करने के तरीके को प्रभावित करता है। बिना आकारके कागज अधिक स्याही सोखता है, इसलिए आकारका इस्तेमाल कर कागज को स्याही सोखने से रोका जाता है जिससे स्याही कागज की शीट के ऊपर बनी रहती है।

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