
नई दिल्ली: उत्तर भारत में ठंड ने दो दिन पहले ही अपनी दस्तक दी है। जहां एक तरफ पहाड़ी इलाकों पर बर्फबारी हुई है। वहीं दूसरी ओर उत्तर भारत के कई राज्यों में रात के समय ठंडी हवाओं का चलन शुरू हो गया है , जिसका कारण दूर के इलाकों में हुई बर्फबारी को बताया जा रहा है । लेकिन क्या आपकों पता है ये बर्फबारी होती कैसे है? आकाश में बर्फ कैसे बनती है और नीचे क्यों गिरती है?
आप जानते होंगे कि हमारी धरती पर जल एक लगातार चक्र में चलता है। सूर्य की ऊर्जा से नदियों, तालाबों, झीलों का जल भाप बनकर उड़ जाता है और वातावरण में पहुंच जाता है । भाप का वजन गर्म होने के कारण वह वायुमंडल में मौजूद हवा से हल्का हो जाता है और ये तेजी से आसमान की तरफ बढ़ता है , ऊपर जाने के साथ ही ये भाप वहां के तापमान के अनुसार बादल का रूप ले लेता है, लेकिन जब ये बादल वातावरण में अधिक ऊपर पहुँच जाते हैं तो वहां का तापमान बहुत ठंडा होने के कारण बादलों में मौजूद वाष्प कण नन्हे-नन्हे बर्फ कणों में बदल जाते हैं , जिनका वजन वाष्प के भार से अधिक होने के कारण हवा इनका बोझ सहन नहीं कर पाती और ये कण बादल से नीचे की ओर गिरने लगते हैं। जब ये गिरते हैं तो एक-दूसरे से टकरा कर जुड़ने लगते हैं। इस तरह इनका आकार बड़ा होने लगता है। जब ये कण हमारी पृथ्वी पर गिरते हैं तो हम उसे बर्फबारी कहते हैं।
अब आप यह कह सकते है कि बर्फ, दरअसल जमा हुआ ठंडा पानी है। बर्फबारी के समय धरती पर अक्सर बर्फ की सफेद चादर-सी बिछ जाती है और जिससे धरती चांद सी प्रतित होती है । आसमान से गिरती हुई बर्फ हमेशा मुलायम नहीं होती है। यह बर्फ गिरते हुए एक जगह साथ में न गिरकर हवा के साथ इधर-उधर फैल जाती है, इसलिए यह कहीं बहुत ज्यादा पायी जाती हैं और कहीं बहुत कम । कभी यह छोटे-छोटे पत्थर के रूप में गिरती हैं , तो कभी बारिश के साथ गिरने वाले सख्त बर्फ यानी ओलों के रूप में भी गिरती है। बर्फ चाहे जिस किसी रूप में भी गिरे, जहां यह गिरती हैं वहां का तापमान काफी नीचे हो जाता है।जिससे वहां के आसपास का वातावरण ठंड हो जाता है ।
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