
Haven't touched colors for 150 years: आज देशभर में छोटी होली मनाई जा रही है, वहीं कल यानी 8 मार्च को बड़ी होली मनाई जाएंगी। होली का पर्व भारत में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन भारत के दो गांव ऐसा है यहां होली मनाया पाप के बराबर माना जाता है और इसके बारे में कहा जाता है कि अगर इन गांवों में होली लोग मनाते है तो उस उनकी कुलदेवी (माता रानी)नाराज हो जाती है।तो चलिए आपको उस गांव के बारें में बताते है।
भारत के इन दो गांव में नहीं मनाई जाती होली
दरअसल छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में 2ऐसे गांव हैं जहां पिछले 150-160साल से लोगों ने रंग-गुलाल नहीं उड़ाए। वहीं होली नहीं मनाने की वजह के बारे गांव वाले कहते है कि होली मनाने से देवी माता का नाराज हो जाती है और उनका प्रकोप सहन करना पड़ सकता है। बता दें कि कोरबा जिले के दो ऐसे गांव है जो होली का त्यौहार सालों से बेरंग मनाते है, इन गांवों में होली के दिन पकवान तो बनते है लेकिन होलिका दहन नहीं होता और ना ही रंग-गुलाल उड़ाए जाते हैं।
150 सालों से नहीं लगाया रंगों को हाथ
जिन गांव में होली नहीं मनाई जाती है इसमें एक का नाम खरहरी है जो 35किलोमीटर की दूरी पर मां मड़वारानी के प्राकट्य पहाड़ों के नीचे बसा है। इस गांव में पिछले 150सालों से होली का त्योहार नहीं मनाया गया है। गांव के बुजुर्गों का मानना है कि उनके जन्म के काफी समय पहले से ही इस गांव में होली ना मनाने का रिवाज है। इस गांव में करीब 650से 700लोग रहते हैं। गांव के बुजुर्गों के अनुसार, यहां सालों पहले भीषण आग लगी थी, गांव के हालात बेकाबू हो गए थे और गांव भर में महामारी फैल गई थी। वहीं दूसरा गांव का नाम धमनागुड़ी है, जो कोरबा से करीब 30किलोमीटर दूर और मड़वारानी से महज 5किमी दूर है। इस गांव में भी पिछले 150सालों से कभी होलिका दहन नहीं हुआ और न ही होली खेली गई।
होली मनाया गांव वासियों पर पड़ सकता है भारी
इस दौरान गांव के लोगों का भारी नुकसान हुआ था और हर तरफ अशांति फैल गई थी. ऐसे में एक रोज गांव के एक बैगा (हकीम) के सपने में देवी मां मडवारानी आईं और उन्होंने बैगा को इस त्रासदी से बचने का उपाय बताया। उन्होंने कहा कि गांव में होली का त्योहार कभी ना मनाया जाए तो यहां शांति वापस आ सकती है। तभी से इस गांव में कभी भी होली का त्योहार नहीं मनाया गया। ग्रामीणों ने बताया कि ना यहां होलिका दहन होता है और ना ही रंग उड़ाए जाते हैं केवल होली के नाम से पकवान बनते हैं।
बता दें कि होली ना मनाने के लिए नियम बनाए गए है और गांव के बड़ों से लेकर बच्चे तक हर कोई नियम का पालन करते है। अब गांव में आने वाले नए लोग अब इन पंरपरों को देखते हुए दूसरे गांव में जाकर होली मना रहे हैं। खासकर शादी होकर आने वाली महिलाएं मायके में जाकर होली मनाना पंसद कर रही है। गांव के टीचर की माने तो बच्चों मे भी बुजुर्गों की बातों का इतना डर है की वे होली नहीं मनाना चाहते।
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