
सिरसा: कहते हैं प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती। कोई भी अगर दृढ़ निश्चय कर ले तो कोई भी मुकाम हासिल कर सकता है। ये सिरसा के मेधांश सोनी ने कर दिखाया है। सिरसा के नोहरिया बाजार में रहने वाला मेधांश यह बता देता है कि 30 साल बाद या 30 साल पहले कौन सी तारीख पर कौन सा वार होगा। लेकिन खास बात यह है कि मेधांश आंखों से देख नहीं सकता। लेकिन काबिलियत इतनी कि कुछ ही पल में ऐसी जानकारी दे देता है।
इसी काबिलियत के चलते मेधांश का पहले नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ और अब एशिया बुक में रिकार्ड दर्ज हुआ है। मेधांश आईएएस बनना चाहता है। अपनी इस काबिलियत का श्रेय अपने पूरे परिवार के अलावा अपने शिक्षक को देते हैं। सिरसा के स्पेशल चाइल्ड मेधांश सोनी ने एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में कैलेंडर ब्वॉय में रिकॉर्ड बनाया है। मेधांश बचपन से ब्लाइंड है। वह 30 सालों में किसी भी डेट का दिन पूछने पर सटीक जानकारी देता है। इससे पहले मेधांश ने इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवाया है। मेधांश के रिकॉर्ड को किसी ने चैलेंज नहीं किया। पिछले वर्ष इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड बनाने के बाद 7 अक्तूबर 2022 को एशिया बुक ऑफ द रिकॉर्ड में नाम दर्ज करवाया।
मेधांश की माता रमता सोनी ने बताया कि इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में उनके बेटे मेधांश से 75 डेट के बारे में पूछा गया था। इसके बाद इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने के बाद उसकी वीडियो एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड के लिए भेजी। उस वीडियो के आधार पर मेधांश का नाम रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। मेधांश बचपन से ही ब्लाइंड है, लेकिन मेधांश की मां रमता सोनी ने उसे ब्लाइंड स्कूल में पढ़ाने की बजाए उसे नॉर्मल स्कूल में नॉर्मल बच्चों के साथ ही पढ़ाया। अब मेधांश सातवीं कक्षा में पढ़ता है। मेधांश साइंस ओलंपियाड में 10 मेडल जीत चुका है। मेधांश को इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड में नाम दर्ज करवाने पर सिरसा के तत्कालीन डीसी प्रदीप कुमार भी सम्मानित कर चुके हैं।
मेधांश की माता का कहना है कि मेधांश बचपन से देख नहीं सकता लेकिन उन्होंने कभी भी उसे विशेष स्कूल में पढ़ाने के लिए नहीं भेजा है। क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि उसके बच्चे को लोग स्पेशल बच्चा कहे। इसलिए उन्होंने शुरू से ही सामान्य स्कूल में दाखिला दिलाया हालांकि शुरू में उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा क्योंकि स्कूल प्रबंधन मेधांश को सामान्य बच्चों के साथ पढ़ने में आनाकानी करते थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अब भी उसे सामान्य बच्चों के साथ ही शिक्षा दिलवा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि आज उसको उसके बेटे के नाम से जाना जा रहा है बहुत खुशी हो रही है। उनके बेटे ने एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है और आगे भी कोशिश यही रहेगी कि आगे भी अन्य रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवा सके। उन्होंने बताया कि सफर आसान नहीं था क्योंकि विशेष बच्चा होने के कारण उन्हें शुरू में काफी परेशानिया आई। लेकिन धीरे-धीरे उन्हें सफलता मिलती रही। उन्होंने कहा कि इस तरह के सभी बच्चों को इस तरह की सुविधाएं मिलनी चाहिए ताकि बच्चे आगे बढ़ सके।
पिता कपिल सोनी ने बताया कि हमें बहुत खुशी हो रही है कि उनके बेटे ने एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराया। उन्होंने बताया कि इसका श्रय उसकी माता और इनके अध्यापकों को देते हैं। उन्होंने बताया कि अपने कार्य के चलते वह ज्यादा ध्यान मेधांश पर नहीं दे पाता। लेकिन फिर भी उसकी माता व टीचर ने बहुत सहायता की। जो ये इस मुकाम तक पहुंच पाया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के सभी बच्चों को पूरी सहायता मिलनी चाहिए ताकि बच्चे आगे बढ़ सके।
जिला शिक्षा अधिकारी संतलाल ने जानकारी देते हुए बताया कि उनके संज्ञान में आया है कि सिरसा के एक बेटे ने एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराया है बहुत खुशी की बात है। उन्होंने बताया कि खास बात यह है कि वह आंखों से देख नहीं सकता और सातवीं कक्षा में पढ़ाई कर रहा है वह भी नॉर्मल बच्चों के साथ यह बहुत बड़ी बात है। वह अपनी तरफ से उनके माता-पिता उस बच्चे को बहुत ही शुभकामनाएं देते हैं।
वहीं छात्र मेधांश ने कहा कि उनसे बहुत खुशी हुई कि उसने उसका नाम इस एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में आया है। उसने बताया है कि जब इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में उसका नाम आया तो उसने बहुत मेहनत की थी और वह यूं ही मेहनत करता रहेगा और आगे भी कई रिकॉर्ड में नाम दर्ज कर आएगा।
Leave a comment