Commonwealth Games 2026: भारत के हरियाणा से ताल्लुक रखने वाली शर्मिला धनखड़ ने 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में महिलाओं के शॉट पुट F57 इवेंट में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। उन्होंने घरेलू हिंसा से उबरने से लेकर मंगलवार को ग्लासगो में पोडियम पर सबसे ऊपर जगह बनाने तक का शानदार सफ़र तय किया।
40 साल की इस भारतीय पैरा-एथलीट ने 9.81 मीटर का अपना अब तक का सबसे अच्छा थ्रो किया। वह घाना की ज़िनाबू इस्सा से काफी आगे रहीं, जिन्होंने 8.65 मीटर के बेस्ट थ्रो के साथ सिल्वर मेडल जीता। ESPN के मुताबिक, नाइजीरिया की यूचारिया इयाज़ी ने 8.19 मीटर के थ्रो के साथ ब्रॉन्ज़ मेडल जीता, जबकि एक अन्य भारतीय खिलाड़ी शिल्पा चौथे स्थान पर रहीं।
शर्मिला की जीत से भारत को इन खेलों में अपना दूसरा गोल्ड मेडल मिला और देश के कुल पदकों की संख्या आठ हो गई। दो गोल्ड, चार सिल्वर और दो ब्रॉन्ज़ के साथ भारत अंक तालिक में आठवें स्थान पर पहुंच गई है। यह जीत उनकी असाधारण ज़िंदगी की कहानी में एक और अहम पड़ाव थी। हरियाणा के चित्राउली गाँव में जन्मीं शर्मिला को दो साल की उम्र में पोलियो हो गया था, जिससे उनका एक पैर प्रभावित हुआ था।
संघंर्ष की कहानी
18 साल की उम्र में शादी होने के बाद, उन्हें अपनी पहली शादी में कई सालों तक शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। उनके अनुसार, दहेज की माँग और दो बेटियों को जन्म देने के कारण उनके साथ बार-बार मारपीट की जाती थी। 26 साल की उम्र में, मारपीट की एक गंभीर घटना के बाद जब उन्हें घर से निकाल दिया गया, तो वह अपनी बेटियों के साथ अपने माता-पिता के घर लौट आईं। उन्होंने अपनी ज़िंदगी के उस मुश्किल दौर में आत्महत्या के विचारों से जूझने के बारे में भी बात की है।
28 साल की उम्र में अजीत सिंह से शादी के बाद उनकी ज़िंदगी ने एक बड़ा मोड़ लिया। अजीत सिंह ने ही एक अख़बार के ज़रिए पैरा-एथलेटिक्स के बारे में जाना और उन्हें इस खेल को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके सपने के प्रति परिवार का समर्पण तब साफ दिखा, जब उन्होंने 2023 में उनकी ट्रेनिंग और कॉम्पिटिशन की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अपना घर बेच दिया। 34 साल की उम्र में एथलेटिक्स का सफ़र शुरू करने के बावजूद, शर्मिला ने तेज़ी से तरक्की की। वह भारत की प्रमुख F57 सीटेड शॉट पुट एथलीट बनकर उभरीं और 2021 में नेशनल चैंपियन बनीं, जिसके बाद उन्होंने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर कामयाबी की नई ऊंचाइयां हासिल कीं।