IAS Asmita Lal: उत्तर प्रदेश के बागपत जिले की कलेक्टर काफी चर्चा में चल रही है और इन दिनों वह जनता के लिए काफी समर्पित भाव से काम कर रही है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना या बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का हो, जिलाधिकारी अस्मिता लाल छोटी-छोटी बातों पर ध्यान रख रही हैं और लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। ऐसा ही एक मामला जब देखने को मिला जब बागपत जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने किसानों के लिए खुद ही कंप्यूटर पर बैठकर काम किया। जनपद की सभी तहसीलों में तहसील दिवस का आयोजन किया गया था। बागपत तहसील दिवस में एक घंटे फरियादियों की समस्याएं सुनने के बाद जिलाधिकारी अचानक कार्यक्रम स्थल से खड़ी हो गईं, उन्होंने अचानक तहसील का निरीक्षण शुरू कर दिया। वह सीधे खतौनी खिड़की पर पहुंचीं और जिलाधिकारी ने तहसील कर्मी से खतौनी की जानकारी लेने लगी। इस दौरान खतौनी खिड़की पर किसानों की भीड़ जमा हो गई।
किसानों से की सीधी बात
जिलाधिकारी ने एक के बाद एक किसानों की खतौनी निकलवाकर उन्हें उपलब्ध कराई। साथ ही उन्होंने किसानों से पूछा कि खतौनी के लिए उनसे कितना शुल्क लिया जा रहा है। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में खतौनी पर शुल्क की राशि स्पष्ट रूप से लिखी जाए। बिना शुल्क राशि दर्ज किए कोई भी खतौनी जारी नहीं की जाए। जिलाधिकारी ने तहसील प्रशासन को किसानों के लिए बैठने की उचित व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए। इसके अलावा पीने के पानी और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने को कहा।
अस्मिता लाल ने कहां से की पढाई?
अस्मिता लाल 2015 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में स्नातक और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से लोक नीति एवं प्रबंधन में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की है। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने अलीगढ़ में असिस्टेंट मजिस्ट्रेट, मुरादाबाद में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, लखनऊ में शासन में विशेष सचिव और गाजियाबाद में मुख्य विकास अधिकारी के पद पर काम किया। वह यूपी सीडा की एसीईओ भी रह चुकी हैं। 18 जनवरी 2025 को उन्होंने बागपत की जिलाधिकारी का पद संभाला था। तहसील दिवस में किसानों के बीच पहुंचकर खुद कंप्यूटर पर खतौनी निकालने का उनका वीडियो और तस्वीरें भी चर्चा में हैं।
कैसे मिली अखिल भारतीय में जगह?
अस्मिता लाल का आईएएस अधिकारी बनने का सपना तीसरी कोशिश में पूरा हुआ वे पहली कोशिश में असफल रहीं, वहीं दूसरी कोशिश में यूपीएससी क्रैक करके भारतीय रेलवे लेखा सेवा (IRAS) की अधिकारी बनीं। इसके बाद तीसरी कोशिश में उन्होंने यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा 2014 में अखिल भारतीय स्तर पर 454वीं रैंक हासिल की, जिसके बाद उन्हें उत्तर प्रदेश कैड मिला।