हरियाणा के एक मात्र कवि जिन्होंने अपनी भाषा में बनाई एक अलग पहचान

हरियाणा के एक मात्र कवि जिन्होंने अपनी भाषा में बनाई एक अलग पहचान

रोहतक:राष्ट्रीय कवि दयाचंद मायना एक मात्र ऐसे कवि थे जिन्होंने अपनी भाषा में रागनियों के जरिए देश-दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई। जिन्हें ज़ॉन मिल्टल के नाम से भी जाना जाता है। दयाचंद मायना को हरियाणा सरकार ने सम्मान अवॉर्ड से सम्मानित किया है। दयाचंद मायना कवियों और लोकगीत कलाकारों में से एक हैं। वह हरियाणवी भाषा में कविताएं और लोकगीत गाते थे। दयाचंद हरियाणा के एकमात्र ऐसे कवि थे जिन्होंने भारत के राष्ट्रीय कवि का दर्जा हासिल किया।

रागनियों में बॉलीवुड का तड़का

जॉन मिल्टल का जन्म 10 मार्च,1915 में रोहतक के मायना गांव में हुआ था। दयाचंद वाल्मीकी जाति से ताल्लूकात रखते है। दयाचंद मायना ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर कथाओं की रचना भी की है। जो काफी प्रसिद्ध हुई। दयाचंद मायना की रागनियां बॉलीवुड फिल्मों में भी आ चुकी है जैसे (पानी आली पानी प्यादे)। उन्होंने 19 किस्से (हरयाणवी में नाटक) और 100 से अधिक रागनियां (हरियाणवी में कविता) लिखे है। इनके नाम से हरियाणा में गायकों को अवार्ड भी दिए जाते है। साथ ही लोगों ने इनके सम्मान में रोहतक के एक चौक का नाम कवि दयाचंद मायना रखा है।

दयाचंद मायना द्वारा गाया राजा हरिश्चन्द्र का किस्सा बहुत पॉपुलर रहा लेकिन इन रागनियों पर कुछ गायकों ने दूसरे कवियों के नाम लगाने शुरू कर दिए। जिसके चलते परिवार और महाशय दयाचंद मायना ट्रस्ट के लोगों ने काफी लंबी लड़ाई लड़ी है और महाशय कवि दयाचंद मायना को सम्मान दिलाने के लिए हर किसी का दरवाजा खटखटाया। आखिर उनकी मेहनत रंग लाई और हरियाणा सरकार ने लोक कवि दयाचन्द मायना सम्मान अवार्ड की घोषणा कर दी।

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