Haryana News: केंद्र सरकार द्वारा रेहड़ी, पटड़ी और ठेला लगाने वाले छोटे कारोबारियों को आर्थिक रूप से संबल बनाने के लिए प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना चलाई जा रही है। वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के संकट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य लॉकडाउन और महामारी से प्रभावित पथ विक्रेताओं को आसान ऋण मुहैया कराकर उनके रोजगार को दोबारा खड़ा करना था। अब वर्ष 2024 में योजना के नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए इसे और अधिक लाभकारी बना दिया गया है, जिससे रेहड़ी-पटड़ी संचालकों को ब्याज के भारी जाल से मुक्ति मिल रही है।
राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन की शहरी वित्त विशेषज्ञ डॉ रश्मि शर्मा ने योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि पहले इस योजना के तहत 10 हजार, 20 हजार और 50 हजार रुपये की किस्तों में ऋण दिया जाता था। अब केंद्र सरकार ने नियमों में संशोधन करते हुए पहली किस्त की राशि 10 हजार से बढ़ाकर 15 हजार रुपये और दूसरी किस्त की राशि 20 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दी है, जबकि तीसरी किस्त में 50 हजार रुपये की वित्तीय सहायता मिलती है। इसके साथ ही योजना में एक नया प्रावधान जोड़ते हुए लाभार्थियों को 30 हजार रुपये की सीमा वाला क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसे वे 40 दिनों तक बिना किसी ब्याज के अपने कारोबार में उपयोग कर सकते हैं। यह पूरा ऋण बिना किसी गारंटी और न्यूनतम दस्तावेजों पर मात्र आधार कार्ड के माध्यम से दो से तीन दिनों में बैंक द्वारा स्वीकृत कर दिया जाता है।
डॉ रश्मि शर्मा ने बताया कि योजना को अब केवल ऋण तक सीमित न रखकर बहुआयामी बना दिया गया है। इसके तहत लाभार्थियों को पीएम सुरक्षा बीमा योजना, पीएम जीवन ज्योति बीमा योजना, पीएम श्रम योगी मानधन योजना, जननी सुरक्षा योजना, पीएम जन धन योजना, बीओसीडब्ल्यू पंजीकरण, वन नेशन वन राशन कार्ड, पीएम मातृ वंदना योजना और आयुष्मान भारत कार्ड जैसी केंद्र की 8 प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं से सीधे जोड़ा जा रहा है। उन्होंने बताया कि भिवानी जिले में अब तक 10 हजार से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स इस योजना का लाभ ले चुके हैं। योजना का प्रसार करने के लिए 1 सितंबर से 30 सितंबर तक लोहारू, बवानी खेड़ा, सिवानी, तोशाम और भिवानी में विशेष लोक कल्याण मेले आयोजित किए जा रहे हैं।
योजना का लाभ लेने वाले भिवानी के ग्वार फैक्ट्री क्षेत्र निवासी नवीन ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि वह नागरिक अस्पताल के सामने रेहड़ी लगाते हैं। उन्होंने सबसे पहले 10 हजार का ऋण लिया, जिसे समय पर चुकाने के बाद 20 हजार और फिर 50 हजार का ऋण प्राप्त कर अपना कारोबार मजबूती से खड़ा किया। नवीन ने कहा कि प्राइवेट फाइनेंस के भारी ब्याज के मुकाबले यह सरकारी योजना बेहद सस्ती और भरोसेमंद है। वहीं डाबर कॉलोनी निवासी जामिल खान ने बताया कि उन्होंने पहले 10 हजार और फिर 20 हजार रुपये का लोन चुकता कर लिया है और अब 50 हजार रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया है। लाभार्थियों का कहना है कि सरकार की इस पहल ने उनकी आजीविका सुधारने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है।