Haryana News: हरियाणा के गुरुग्राम जिले के मानेसर में मुख्यमंत्री नायब सैनी ने 77वें राज्य स्तरीय वन महोत्सव में की बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह केवल पौधे लगाने का कार्यक्रम नहीं बल्कि प्रकृति के प्रति अपना ऋण चुकाने का संकल्प लिया है। यह संकल्प को संस्कार में और संस्कार को जन आंदोलन में बदलने का दिन है। इस अवसर पर वन विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और हरित हरियाणा के निर्माण में जुटे हर नागरिक को सीएम ने बधाई दी।
सीएम सैनी ने कहा कि दुनिया आज पर्यावरण संरक्षण की बात कर रही है लेकिन भारत ने हजारों वर्ष पहले ही प्रकृति को पूजा का विषय बना दिया। हमारे लिए प्रकृति की रक्षा कोई आधुनिक विचार नहीं बल्कि हमारी सनातन संस्कृति का मूल संस्कार है। इस वन महोत्सव का पहला चरण गत 30 जुलाई को करनाल में आयोजित किया गया है। इस वर्ष हमने निर्णय लिया कि हरियाणा के सभी 90 विधानसभा क्षेत्र में वन महोत्सव आयोजित किए जाएंगे।
सीएम सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हम सब देशवासियों को एक पेड़ मां के नाम लगाने का भावपूर्ण मंत्र दिया। हमने इस अभियान को जन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने का काम किया। मानेसर और गुरुग्राम की पहचान हरियाली, स्वच्छ हवा और प्रकृति से भी बनी रहे यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पंचायत और सार्वजनिक भूमि पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण करने का निर्णय लिया है। दुर्लभ तथा संकटग्रस्त वृक्ष प्रजातियों के संरक्षण के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने की योजना भी बनाई जा रही है।
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सीएम सैनी ने कहा कि हमने वर्ष 2025 -26 के दौरान प्रदेश में कुल 1 करोड़ 52 लाख पौधे लगाए। औषधीय पौधों के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रदेश में 58 हर्बल पार्क स्थापित किए। प्राकृतिक ऑक्सीजन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के हर गांव में पंचवटी के नाम से पौधारोपण किया जा रहा है। प्रदेश में 610 वन मित्र हरियाली बढ़ाने और पौधों की देखभाल में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
जहां सड़कें भी हों और छायादार वृक्ष भी सुरक्षित रहें- सीएम सैनी
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर आगे बढ़ रही है। उन्होंने महत्वपूर्ण और पुराने वृक्षों के संरक्षण के लिए 'प्राण वायु देवता योजना' का विस्तार करने की घोषणा करते हुए कहा कि विकास का वास्तविक अर्थ प्रकृति को पीछे छोड़ना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाना है जहां सड़कें भी हों और छायादार वृक्ष भी सुरक्षित रहें। मुख्यमंत्री ने सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान और भिंडावास वन्यजीव अभयारण्य को रामसर स्थलों के रूप में मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान को प्रदेश के लिए गौरव बताया तथा सभी नागरिकों से स्थानीय जलवायु के अनुकूल पौधे लगाने और हरियाणा की हरियाली को अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी मानने का आह्वान किया।