
गुरुग्राम: हरियाणा के साइबर सिटी गुरुग्राम के सेक्टर 37-सी में हुई युवक की हत्या मामले में गुरुग्राम पुलिस की सेक्टर 40 क्राइम यूनिट ने अरोपी को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा कर दिया है। दरअसल मूल रूप से समस्तीपुर निवासी अरुण सेक्टर 37 सी में किराए के मकान में रह रहा था और एक मेडिकल स्टोर पर नौकरी कर रहा था। कुछ दिन पहले संदीप भी इसके साथ रहने के लिए पहुचा। गुरुग्राम पहुचने पर संदीप ने मेडिकल स्टोर पर नोकरी करने लगा, जबकि अरुण लेबर का काम कर रहा था। दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया।
इसी विवाद के चलते संदीप ने अरुण की हेलमेट से चोट मार कर घायल कर दिया और फिर गला दबाने के बाद अरुण को झाड़ियों में लेजाकर फेंक दिया। कुछ देर बाद संदीप वापस आया तो अरुण की सांस चलती हुई देख उसका पारा चढ़ गया और उसने वहा पड़े पत्थर से अरुण पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि संदीप अपने दोस्त अरुण पर तब तक हमला करता रहा ,जब तक उसके प्राण पखेरू उड़ नही गए।
पुलिस की माने तो शव को वह फेकने के बाद संदीप ने इसकी जानकारी मृतक की पत्नी को दी। वही सुबह होने पर जब पुलिस को हत्या की जानकारी मिली तो पुलिस घटना स्थल पर पहुची और शव को कब्जे में ले जांच शुरू कर दी। पुलिस ने मेडिकल स्टोर संचालक की शिकायत पर मामला दर्ज कर अरोपी की तलाश शुरू कर दी। मामला सेक्टर 40 क्राइम यूनिट को सौंपा गया।
जांच के दौरान क्राइम यूनिट ने इस हत्याकांड में संदीप को काबू कर पूछताछ शुरू की तो उसने अपना जुर्म कबूल लिया। पूछताछ के दौरान संदीप ने बताया कि वह यहा अशोक नाम से रह रहा है, जोकि उसके ताऊ का लड़का है और उसकी ही आईडी इस्तेमाल कर रहा है,जिससे किसी को उसकी असलियत मालूम न हो सके। इससे पहले वह 2015 से 2019 तक जेल में बंद था। उसपर गुंडा एक्ट और चोरी के अनेक मामले दर्ज है।
गुरुग्राम पुलिस ने हत्या के मामले में भले ही दोस्त को गिरफ्तार कर इस मामले को सुलझा लिया हो, लेकिन दोस्त दुवारा मामूली सी बात पर दोस्ती का कत्ल यह कोई पहली घटना नही है। इससे पहले भी अनेक मामले सामने आ चुके है, जो कि सोचने पर मजबूर करते है कि किस पर विश्वाश किया जाए और किस पर नहीं है।
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