HARYANA: ACCIDENT के बाद शख्स की बदली किस्मत, बना डाली MULTIPURPOSE FOOD PROCESSING MACHINE

HARYANA: ACCIDENT के बाद शख्स की बदली किस्मत, बना डाली MULTIPURPOSE FOOD PROCESSING MACHINE

नई दिल्ली:  हमें बचपन से ही कहा जाता हैं कि पढ़ाई के बिना कुछ नहीं हैं। पढ़ लेंगे तो कुछ बन जाओगे नहीं तो ऐसे ही घुमना पड़ेगा। पढ़ाई को लेकर कई कहावत भी हैं जिसे हम सुनते आ रहे हैं ऐसी ही एक कहावत हैं जिसमें कहा गया हैं कि पढ़े-लिखोगे बनोगे नवाब, खेलों-खुदोंगे बनोगे खराब, हालांकि अगर कोई बच्चा पढ़ाई में कमजोर हैं और खेल में आगे हैं तो खेल में भी बच्चें अपना अच्छा करियर बना रहें हैं, लेकिन अगर हम आपको कहे की पढ़े के बिना भी आप दुनिया में छा सकते हैं तो इस बात पर विश्वास करना थोड़ा मुश्किल होगा। तो चलिए आज हम आपको एक ऐसे इंसान के बारे में बताते हैं जिन्होंने 10वीं कक्षा तक पढ़ाई की हैं लेकिन इन्होंने अपने जीवन में कुछ ऐसे-ऐसे कारनामें किए है जिसकी वजह से आज वो देश-दुनिया में महसूस हो रहे है।

हरियाणा का धर्मवीर बना साइंटिस्ट

दरअसल ये कहानी हैं उस इंसान की जिसने अपने जीवन में सब कुछ देखा हैं। उस इंसान के जीवन में एक ऐसा भी समय आया था जब उसने रिक्शा चलाया और अपनी परिवार को पाला, लेकिन आज उनकी देश-दुनिया में चर्चा हो रही हैं। हम बात कर रहे हैं हरियाणा के धर्मवीर कांबोज की। जिसकी उम्र 60 साल हैं। धर्मवीर कांबोज ने केवल 10वीं तक की पढ़ाई की हैं लेकिन आज धर्मवीर कांबोज बहुत बड़े साइंटिस्ट बन चुके हैं। उन्होंने ऐसी ऐसी मशीनें तैयार कर दी हैं जिनसे खेत में ही किसान टमाटर से केचप, एलोवेरा की पत्तियों से एलोवेरा जूस, पल्प और साबुन-शैंपू आदि बना सकते हैं।

5 साल तक चलाई रिक्शा

धर्मवीर कांबोज एक समय आर्थिक तंग से परेशान होकर दिल्ली में रिक्शा चलाई। उन्होंने दिल्ली में चार-पांच साल तक रिक्शा चलाया। रिक्शा लेकर वे अपने ग्राहकों को जड़ी बूटी की मार्केट और मंडी में जाते थे। वहां उन्होंने धीरे-धीरे जड़ी बूटियों का काम देखा और समझा। इसके साथ ही वह पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास मौजूद एक पब्लिक लाइब्रेरी जाते थे, जहां वे किताबें पढ़ते थे। रात को रैन बसेरे में सोए और अपने पैसे बचाकर परिवार को चलाने की कोशिश की, लेकिन एक हादसे ने उसकी जीवन को बदल दिया। एक बार जब उनका एक्सीडेंट हो गया तो उस घटना ने उनका दिमाग बदल दिया और उन्होंने दिल्ली छोड़ने का फैसला कर लिया।

राष्ट्रपति पुरस्कार से जा चुका हैं नवाजा

 हरियाणा जाने का फैसला किया तो उन्होंने आंवला, एलोवेरा और इस तरह की अन्य जड़ी बूटियों से प्रोडक्ट बनाने वाली मशीन का आविष्कार किया। उन्होंने एक मशीन बनाने के लिए फैब्रिकेटर के पास जाकर उसे डिजाइन बताया और उसका आर्डर दिया। पहली मशीन उन्होंने ₹35000में तैयार कराई। इसके बाद तो जैसे धर्मवीर कांबोज की लॉटरी लग गई। धर्मवीर कांबोज की मशीन आज दुनिया के 25से अधिक देशों में जाती हैं। मशीन का आविष्कार के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार मिल चुका है। मल्टीपर्पज फूड प्रोसेसिंग मशीन बनाकर धर्मवीर कांबोज ने देश ही नहीं दुनिया के लाखों लोगों का जीवन आसान कर दिया है।

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