Haryana News: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मौजूदा हरियाणा राज्य स्टार्टअप नीति 2022 में व्यापक पूरक प्रावधान को मंजूरी दी गई। इसका उद्देश्य राज्य में स्टार्टअप प्रणाली को और मजबूत करना, नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देना, स्टार्टअप क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना तथा उभरते उद्यमियों को बेहतर वित्तीय एवं संस्थागत सहायता उपलब्ध कराना है।
यह पूरक प्रावधान संकल्प पत्र के तहत की गई वित्त वर्ष 2025-26 के बजट भाषण की विभिन्न घोषणाओं, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री के निर्देशों तथा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा विभिन्न राज्य स्तरीय कार्यक्रमों और स्टार्टअप एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ संवाद के दौरान की गई घोषणाओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य नीति के तहत अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना तथा स्टार्टअप को उनके विकास के विभिन्न चरणों में अधिक प्रभावी सहायता प्रदान करना है।
पूरक प्रावधानों के तहत महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप को एक वर्ष के लिए लीज के किराए में 50 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी, जो अधिकतम 10 लाख रुपये तक होगी। महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप को सात वर्ष की अवधि के लिए शुद्ध एसजीएसटी की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति भी दी जाएगी, जो स्थायी पूंजी निवेश (एफसीआई) के 100 प्रतिशत की सीमा तक होगी। सामान्य स्टार्टअप को सात वर्ष की अवधि तक एसजीएसटी की 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति मिलेगी।
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मंजूर किए गए पूरक प्रावधानों के तहत स्टार्टअप को टेक्नोलॉजी लाइसेंसिंग और टेक्नोलॉजी हस्तांतरण के लिए 10 लाख रुपये तक की सहायता भी दी जाएगी। इसके अलावा, हस्तशिल्प एवं पारंपरिक वस्त्र, पर्यावरण अनुकूल ग्रामीण उत्पाद, आयुर्वेद आधारित स्वास्थ्य एवं कल्याण उत्पाद तथा स्वदेशी खाद्य उत्पाद जैसे क्षेत्रों में कार्य करने वाले महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप को 50,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक के विषयगत सूक्ष्म अनुदान के माध्यम से प्रोत्साहित किया जाएगा।
स्टार्टअप को बड़े बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराने के लिए घरेलू आयोजनों और प्रदर्शनियों में भागीदारी हेतु वित्तीय सहायता दी जाएगी। सामान्य स्टार्टअप को भागीदारी लागत के लिए प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक, जबकि महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप को प्रति वर्ष 7 लाख रुपये तक की सहायता मिलेगी। सरकार ने स्टार्टअप को गुणवत्ता मानकों को अपनाने और प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करने के प्रावधान भी किए हैं। स्टार्टअप को गुणवत्ता प्रमाण-पत्र प्राप्त करने पर होने वाली लागत की 50 प्रतिशत की एकमुश्त प्रतिपूर्ति मिलेगी, जो अधिकतम 25 लाख रुपये तक होगी।