Haryana Budget 2026: 'खोदा पहाड़ निकली चुहिया...', सैनी सरकार के बजट 2026 पर हुड्डा ने कसा तंज

Haryana Budget 2026: 'खोदा पहाड़ निकली चुहिया...', सैनी सरकार  के बजट 2026 पर हुड्डा  ने कसा तंज

Haryana Budget 2026 :पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ये बजट नहीं, बल्कि कोरी भाषणबाजी है, जिसमें कुछ भी हकीकत नहीं, सिर्फ लफ्फाजी है। हुड्डा ने कहा कि बीजेपी ने हरियाणा को 5.56लाख करोड़ के कर्जे तले दबा दिया है। क्योंकि 2026-27के बजट के अनुसार आंतरिक ऋण 3,91,435करोड़ रुपये है। छोटी बचतें अनुमानित 50,000करोड़ रुपये हैं, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम 68,995करोड़ (2025-26के अनुसार), और अतिरिक्त देनदारियां (बिजली बिलों का बकाया व सब्सिडी) 46,193करोड़ हैं। यानी कुल राज्य पर कुल ऋण लगभग 5,56,623करोड़ रुपये पहुंच चुका है, जो भारी वित्तीय दबाव और अर्थव्यवस्था की खस्ता हालत को दिखाता है।

लाडो लक्ष्मी योजना पर बोलते हुए हुड्डा ने कहा कि राज्य में 18से 60वर्ष की आयु की महिलाओं की अनुमानित संख्या 8,250,000 (82.5लाख) है। यदि इस योजना के तहत प्रत्येक महिला को प्रति माह 2,100रुपये की भत्ता दिया जाए, तो पूरे वर्ष (12महीने) के लिए कुल अनुमानित राशि लगभग 20,790करोड़ रुपये (लगभग 20,000करोड़) बनती है। लेकिन 2026-27के बजट में इस योजना के लिए केवल 6,500करोड़ रुपये ही प्रावधान किए गए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि बजट में उपलब्ध राशि से केवल लगभग 31.25%महिलाओं को ही कवर किया जा सकता है, यानी करीब 67.5%महिलाओं को इस योजना से बाहर रखा गया है या उन्हें लाभ नहीं मिल पाएगा।

राज्य का नया बजट 2,23,658करोड़ रुपये का है, जो पिछले वर्ष 2025-26के 2,05,017करोड़ रुपये के बजट से 9%अधिक है। लेकिन राज्य में मुद्रास्फीति दर लगभग 5%होने के कारण वास्तविक वृद्धि मात्र 4%के आसपास ही है। यानी 10प्रतिशत बढ़ोत्तरी का दावा पूरी तरह भ्रामक है।बजट के मुताबिक सरकार आंतरिक ऋण 76,250करोड़ रुपये उठा रही है, जबकि ऋण चुकौती (मूलधन 36,101करोड़ + ब्याज 29,566करोड़) कुल 65,667करोड़ रुपये है। इससे अन्य व्यय के लिए मात्र 10,593करोड़ रुपये ही बच पाते हैं।शिक्षा के लिए 22,914करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं (प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा सहित), जो कुल बजट का मात्र 6.2%है। यह जीएसडीपी का केवल 1.9%है, जबकि नई शिक्षा नीति में शिक्षा पर 6%व्यय की सिफारिश की गई है।

स्वास्थ्य के लिए 14,007करोड़ रुपये का प्रावधान है, जो कुल बजट का मात्र 6.2%है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017के अनुसार बजट व्यय का कम से कम 8%स्वास्थ्य पर होना चाहिए। साथ ही, यह जीएसडीपी का केवल 1.1%है, जबकि नीति में 2.5%की आवश्यकता बताई गई है।कृषि पर व्यय कुल व्यय का मात्र 4.8%है, जबकि राज्य की 70%आबादी कृषि पर निर्भर है। यह स्थिति कृषि क्षेत्र की उपेक्षा को दर्शाती है।

जहां तक पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) की बात है तो ऋण चुकाने और तमाम अग्रिम भुगतानों के बाद पूंजीगत व्यय के लिए केवल 21,756करोड़ रुपये बचते हैं, जो कुल बजट का मात्र 9.7%है। ये नए मेडिकल कॉलेज, सड़कें, पुल और बजट में घोषित अन्य परियोजनाओं के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध नहीं हैं।

 

कुल व्यय में पूंजीगत व्यय मात्र 28%है, जबकि उधार ली गई राशि का अधिकांश हिस्सा चालू खपत और पुराने ऋण चुकाने में उपयोग हो रहा है। इससे पूंजी सृजन, विकास गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं और राज्य की आर्थिक वृद्धि नहीं हो पा रही है। हुड्डा ने कहा कि ख़ुद बजट के आंकड़ों और मुख्यमंत्री के भाषण में हताशा नजर आती है। क्योंकि सरकार के पास ना महंगाई को रोकने की कोई योजना है, ना रोज़गार सृजन का कोई प्लान है, ना किसानों की एमएसपी का कोई प्रावधान है, ना इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देने की राशि है।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि बीजेपी प्रति व्यक्ति आय के आधे अधूरे आंकड़े पेश किए। उसने ये तो बताया कि बीजेपी सरकार में कितनी आय बढ़ी। लेकिन ये नहीं बताया कि कांग्रेस सरकार में आय बढ़ने की गति कितनी तेज थी। कांग्रेस सरकार के दौरान प्रति व्यक्ति आय लगभग 37,000से बढ़कर लगभग 1,50,000रुपये हुई थी यानी 4गुणा बढ़ी थी। जबकि बीजेपी के 10साल में यह सिर्फ 2गुणा ही बढ़ी। यानी अगर कांग्रेस सरकार जितनी रफ्तार से बढ़ती तो आज हरियाणा की प्रति व्यक्ति आय लगभग 6-7लाख रुपये होती। जबकि फिलहाल ये सिर्फ 3-4लाख ही है।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि रोजगार सृजन पर यह सरकार पूरी तरह खामोश है। यहां तक कि खुद मुख्यमंत्री ने मान लिया है कि कांग्रेस सरकार ने हरियाणा में उद्योग व रोजगार को बढ़ावा देने के लिए जो आईएमटी स्थापित की थीं, उनकी हालत आज बेहद खराब है। ऐसे में नए उद्योग और नया निवेश हरियाणा में हो ही नहीं रहा है, बल्कि पहले से स्थापित उद्योग भी यहां से पलायन कर रहे हैं। यही वजह है कि हरियाणा बेरोजगारी में नंबर वन हो चुका है।

इतना ही नहीं, सत्ता में रहने के 11साल बाद सरकार को यमुना की सफाई याद आई है, जबकि बीजेपी के पूरे कार्यकाल से हरियाणा देश का सबसे अधिक हवा और जल प्रदूषित राज्य बना बना हुआ है।इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री ने स्पष्ट माना कि हरियाणा में सरकार जरूरत के मुताबिक लोगों और खेती को जल उपलब्ध नहीं करवा पा रही है। बावजूद इसके उन्होंने पंजाब से हरियाणा के हिस्से का पानी यानी SYL का अधिकार लेने का कोई जिक्र नहीं किया।

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