Haryana News: हरियाणा के भिवानी में बाल श्रम के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू किया है। बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) और पुलिस की क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने हांसी गेट स्थित लक्ष्मी मिष्ठान भंडार पर छापेमारी कर बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। अब बच्चों की काउंसलिंग की जा रही है और उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
हरियाणा के भिवानी में बच्चों के अधिकारों की रक्षा और बाल श्रम पर रोक लगाने के उद्देश्य से बाल कल्याण समिति और पुलिस की क्राइम ब्रांच ने संयुक्त अभियान चलाया। टीम ने हांसी गेट स्थित लक्ष्मी मिष्ठान भंडार पर छापेमारी कर वहां काम कर रहे चार नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू किया। कार्रवाई के बाद सभी बच्चों को सुरक्षित माहौल में बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया, जहां विशेषज्ञों द्वारा उनकी काउंसलिंग की जा रही है।
जिला बाल कल्याण समिति के सदस्य अधिवक्ता धीरज सैनी ने बताया कि बाल श्रम और बच्चों के शोषण पर रोक लगाने के लिए गठित विशेष टीम ने पूरी मुस्तैदी के साथ यह कार्रवाई की। इस अभियान में क्राइम ब्रांच से एएसआई विनोद कुमार, एचसी संदीप, एचसी और ईएएसआई पवन और सीडब्ल्यूसी के सदस्य अधिवक्ता धीरज सैनी, दिनेश अत्री और नीलम रानी ने भाग लिया। वहीं सीडब्ल्यूसी स्टाफ रिंकू, हेमलता और दीपाली का भी अभियान में महत्वपूर्ण योगदान रहा।
सीडब्ल्यूसी के चेयरमैन अधिवक्ता प्रदीप सिंह तंवर ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उनके हाथों में किताबें और कलम होनी चाहिए, न कि बाल श्रम का बोझ। उन्होंने कहा कि समिति की प्राथमिकता हर बच्चे को सुरक्षित, भयमुक्त और शिक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। रेस्क्यू किए गए बच्चों की काउंसलिंग की जा रही है और उनके पुनर्वास के साथ-साथ शिक्षा की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
बाल कल्याण समिति ने स्पष्ट किया कि बच्चों को पूरी संवेदनशीलता के साथ उनके परिवारों से मिलाने और शिक्षा से वंचित बच्चों का स्कूलों में दाखिला कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि बाल अधिकारों के संरक्षण और बाल श्रम के खिलाफ ऐसे अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे। इस कार्रवाई की क्षेत्र में व्यापक सराहना हो रही है।