Delhi Land Record Bill: दिल्ली सरकार राजधानी की हर संपत्ति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार जल्द ही ऐसा कानून लाने की तैयारी में है, जिसके तहत दिल्ली के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की हर जमीन और मकान को एक 'प्रॉपर्टी आधार कार्ड' दिया जाएगा। इसका उद्देश्य संपत्ति से जुड़े विवाद कम करना और मालिकाना हक का स्पष्ट रिकॉर्ड तैयार करना है। यह पहल केंद्र सरकार की स्वामित्व (SVAMITVA) योजना के तहत शुरू हुई है। पहले चरण में दिल्ली के 48 ग्रामीण गांवों में से 30 गांवों का सर्वे पूरा कर लिया गया है और वहां संपत्ति कार्ड तैयार किए जा रहे हैं। अब सरकार इस व्यवस्था को पूरी दिल्ली में लागू करने की योजना बना रही है।
विधानसभा के विशेष सत्र में पेश किया जाएगा
इस संबंध में प्रस्तावित दिल्ली भूमि रिकॉर्ड विधेयक, 2026 को विधानसभा के विशेष सत्र में पेश किया जाएगा। इस कानून के लागू होने के बाद पूरी दिल्ली का आधुनिक तकनीक से सर्वे कराया जाएगा और हर संपत्ति का डिजिटल रिकॉर्ड बनाया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे जमीन और मकान से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी और अदालतों में चल रहे संपत्ति विवादों की संख्या भी कम होगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली के लाल डोरा क्षेत्रों में वर्षों से संपत्तियों का प्रमाणित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। इन इलाकों में मालिकाना हक को लेकर अक्सर विवाद होते रहे हैं। स्वामित्व योजना के जरिए इस पुरानी समस्या का समाधान किया जा रहा है।
SVAMITVA देगा पूरी जानकारी
सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले SVAMITVA प्रॉपर्टी कार्ड में संपत्ति की पूरी जानकारी होगी। इसमें प्रॉपर्टी आईडी नंबर, मालिक का नाम, परिवार की जानकारी, गांव और जिले का नाम, जमीन का क्षेत्रफल, भू-आधार नंबर और जारी करने की तारीख दर्ज होगी। कार्ड पर एक QR कोड भी होगा, जिसे स्कैन करने पर संपत्ति का डिजिटल नक्शा, सीमाएं, खसरा नंबर और कानूनी रूप से मान्य कब्जा प्रमाण पत्र देखा जा सकेगा।
संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा
स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन सर्वे और राजस्व अधिकारियों की जांच के माध्यम से संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। अब तक 12,232 संपत्तियों का सर्वे किया जा चुका है। इनमें से 8,423 संपत्तियां विवाद मुक्त पाई गई हैं। दक्षिण और उत्तर-पश्चिम दिल्ली के सभी सर्वे किए गए मामलों का निपटारा भी हो चुका है। सरकार का कहना है कि भविष्य में इन सभी रिकॉर्ड को दिल्ली ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन इंफॉर्मेशन सिस्टम (DORIS) से जोड़ा जाएगा, जिससे संपत्ति से जुड़ी सभी जानकारी डिजिटल रूप से उपलब्ध होगी और खरीद-बिक्री की प्रक्रिया भी अधिक आसान और पारदर्शी बन सकेगी।
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