
GOOD FRIDAY: 7 अप्रैल को दुनिया भर में गुड फ्राइडे मनाया जाएगा। यह पर्व ईसाई धर्म के लोगों मनाते है। इस दिन ईसाई लोग शोक दिवस के तौर पर मनाते है क्योंकि यहूदी शासकों ने ईसा मसीह को तमाम शारीरिक और मानसिक यातनाएं देने के बाद सूली पर चढ़ाया था और वह हंसते-हंसते अपनी जीवन कुर्बान कर दिया था, लेकिन तीन दिन बाद यानी रविवार को वह जिंदा भी हो गए थे। जब भी से इस दिन को ईसाई धर्म को मानने वाले कुर्बानी दिवस के रूप में मनाते हैं।
Good Friday का इतिहास
दरअसल अगर इस दिन के इतिहास की बात करें तो दो हजार साल पहले ईसा यरूशलम के गैलिलि स्टेट में मानवता और शांति का संदेश दे रहे थे, जिससे लोगों ने उन्हें भगवान मानना शुरू कर दिया। ईसा के विचारों को वहां के लोग अपने जीवन में उतारने लगे। उन्होंने धर्म के नाम पर अंधविश्वास फैलाने वाले लोगों को मानव जाति का दुश्मन बताया था। उनके संदेशों से परेशान होकर धर्म के नाम पर झूठ फैलाने वाले धर्मपंडितों को उनसे जलन होने लगी। यहां तक कि उन लोगों ने ईसा को मानवता का शत्रु बताना शुरू कर दिया और उन्हें मृत्यु दंड देने का फरमान जारी कर दिया।
ईसा की लोकप्रियता दिन-ब-दिन बढ़ती गई, जिस वजह से धर्म गुरुओं ने उनके खिलाफ रोम के शासक पिलातुस के कान भरना शुरू कर दिए। वहीं दूसरी तरह यहूदी शासक ईसा को पापी और पाखंडी बता रहे थे। ईसा मसीह पर धर्म की अवमानना का आरोप लग गया। ईसा को कई यातनाएं दी गई. उनके सिर पर कांटों का ताज रखा गया, कई कोड़े-चाबुक मारे गए और उन्हें सूली (क्रॉस) पर लटका दिया गया। ईसा ने ऊंची आवाज में परमेश्वर को पुकारा और कहा, "हे परमात्मा, मैं अपनी आत्मा को तेरे हाथों सौंपता हूं।" इसके बाद उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए।
ईस्टर संडे का है काफी महत्व
ईसाई धर्म के लोग अंडे को नया जीवन और उमंग का प्रतीक मानते हैं। ईस्टर पर अंडों का विशेष महत्व होता है। इस दिन लोग अलग-अलग तरह से अंडों को सजाते हैं। इसके साथ ही एक-दूसरे को अंडे गिफ्ट में भी देते हैं। इस दिन ईसाई धर्म को मानने वाले लोग चर्च में जाते हैं और प्रभु यीशु को याद करते हैं। उनकी याद में चर्च यानी चर्च में मोमबत्तियां जलाई जाती हैं। लोग बाइबिल पढ़ते हैं और प्रभु यीशु के जीवित होने की खुशी में एक दूसरे को बधाई देते हैं।
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