
Sonam Wangchuk Detention Revoked: केंद्र सरकार ने लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और नवोन्मेषक Sonam Wangchuk की हिरासत समाप्त करने का फैसला लिया है। गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत उपलब्ध शक्तियों का उपयोग करते हुए उनकी हिरासत तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी है। गृह मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि सरकार लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी भरोसे का माहौल बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
इसी उद्देश्य से सभी पक्षों के साथ सार्थक और रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देने के लिए यह निर्णय लिया गया है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार लद्दाख के विभिन्न समुदायों और नेताओं से लगातार बातचीत कर रही है ताकि क्षेत्र के लोगों की चिंताओं और मांगों को समझा जा सके।
पत्नी गीतांजलि ने दिया बयान
बता दें कि ये फैसला उस समय आया है जब वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने एक इंटरव्यू में कहा कि रिहाई के बाद वांगचुक आंदोलन या विरोध का रास्ता नहीं अपनाएंगे। उन्होंने बताया कि वांगचुक लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा की मांग को आगे बढ़ाने के लिए शांतिपूर्ण बातचीत और संवाद का रास्ता ही अपनाएंगे।
जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद थे
वांगचुक फिलहाल जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद थे। उन्होंने 12 मार्च को अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए यह संदेश भी दिया था कि उन्होंने सामाजिक आंदोलन से दूरी नहीं बनाई है, लेकिन आगे बढ़ने के लिए स्पष्टता, एकता और ईमानदार संवाद जरूरी है। केंद्र सरकार ने पहले वांगचुक को एनएसए के तहत हिरासत में लिया था। सरकार का आरोप था कि उन्होंने नेपाल और बांग्लादेश में हुए प्रदर्शनों का जिक्र कर लोगों को भड़काने की कोशिश की थी। इसके बाद उन्हें राजस्थान की जेल में शिफ्ट कर दिया गया था।
सरकार कोर्ट में कही ये बात
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में ये भी कहा था कि वांगचुक की तबीयत को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं, वे सही नहीं हैं। सरकार के अनुसार हिरासत के दौरान पांच महीनों में उनकी 24 बार मेडिकल जांच की गई और वह पूरी तरह स्वस्थ पाए गए। अब सरकार के इस फैसले के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि लद्दाख के मुद्दों पर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की दिशा में नई शुरुआत हो सकती है।
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