Ghaizabad ED Raid: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को गाजियाबाद और दिल्ली में कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह अभियान एक रियल एस्टेट डेवलपर और सहकारी समिति के अधिकारियों से जुड़े एक कथित हाउसिंग सोसाइटी धोखाधड़ी मामले की जांच के अंतर्गत चलाया गया है। यह तलाशी अभियान ईडी के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 17 के तहत जारी है। यह जांच श्रस्थ प्रॉपबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर संदीप सिंह और सेवा सुरक्षा सहकारी आवास समिति के पदाधिकारियों के खिलाफ की जा रही है।
अधिकारों का किया दुरुपयोग
घटनाक्रम से जुड़े अधिकारियों ने एएनआई को बताया कि आरोपी ने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के अकबरपुर बहरामपुर आवासीय इलाके में स्थित लगभग 41,544 वर्ग मीटर जमीन पर सहकारी आवास समिति के सदस्यों को पुनर्विकास परियोजना के तहत आवासीय फ्लैट उपलब्ध कराने का वादा करके उनके अधिकार छोड़ने के लिए प्रेरित किया। जांचकर्ताओं को संदेह है कि आरोपियों ने बाद में समिति के सदस्यों से प्राप्त विकास अधिकारों का दुरुपयोग किया और धोखाधड़ी से समिति की जमीन और फ्लैट तीसरे पक्षों को बेच दिए। अधिकारियों का आरोप है कि इन लेन-देन से प्राप्त अपराध की धनराशि की अब मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी कानूनों के तहत जांच की जा रही है।
तलाशी अभियान चलाया जा रहा
अधिकारियों ने बताया कि कथित धन शोधन से संबंधित सबूत जुटाने और कथित धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि के प्रवाह का पता लगाने के लिए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। इससे पहले 24 जून को प्रवर्तन निदेशालय ने 493 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अल-फलाह ट्रस्ट के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी की अंतरिम जमानत याचिका पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा था कि आरोपी आपराधिक गतिविधियों के माध्यम से कथित रूप से अर्जित अपराध की धनराशि को नष्ट या छिपा सकते हैं।
छह सप्ताह की अंतरिम जमानत की मांग
8 जुलाई के लिए मामले की अगली सुनवाई निर्धारित है। अल-फलाह के अध्यक्ष सिद्दीकी ने अपनी पत्नी के कैंसर के इलाज के लिए छह सप्ताह की अंतरिम जमानत मांगी थी। 17 जून को दिल्ली उच्च न्यायालय ने सिद्दीकी की अंतरिम जमानत याचिका पर ईडी से स्थिति रिपोर्ट मांगी। निचली अदालत द्वारा उनकी याचिका खारिज किए जाने के बाद सिद्दीकी ने उच्च न्यायालय का रुख किया था।
धोखा देकर की जाती थी वसूली
ईडी ने बुधवार को अपने जवाब में कहा कि आरोपी एक वित्तीय योजना का मुख्य सूत्रधार और लाभार्थी था, जिसके तहत विश्वविद्यालय की एनएएसी मान्यता, यूजीसी धारा 12(बी) के झूठे दावों और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) और चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय (डीएमईआर), हरियाणा को कथित रूप से धोखा देकर ट्यूशन फीस वसूली जाती थी। एजेंसी के अनुसार, इन निधियों को बाद में परिवार के स्वामित्व वाली संस्थाओं और विदेशी निवेशों में स्थानांतरित कर दिया गया था।
Also read: Digital Arrest Scams के खिलाफ CBI का 'ऑपरेशन चक्र-VI', दिल्ली-हरियाणा समेत 16 राज्यों में छापेमारी