CBI Digital Arrest Scams: डिजिटल अरेस्ट स्कैम को बढ़ावा देने वाले साइबर क्राइम नेटवर्क के खिलाफ़ एक बड़ी कार्रवाई की जा रही है। जिसके लिए सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) 'ऑपरेशन चक्र-VI' चला रही है। इसके तहत 60 स्पेशल टीमें बनाईं, जिन्होंने पंजाब, गुजरात, दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, असम, पश्चिम बंगाल, मणिपुर, कर्नाटक और ओडिशा में 80 से ज़्यादा जगहों पर एक साथ छापेमारी की।
'ऑपरेशन चक्र-VI' के तहत डिजिटल अरेस्ट स्कैम का खातमा
'ऑपरेशन चक्र-VI' के तहत CBI ने एक बयान जारी किया है। जिसमें उन्होंने बताया 'ये छापेमारी एक चल रही जांच का हिस्सा थीं, जिसका मकसद डिजिटल अरेस्ट स्कैम के 200 से ज़्यादा मामलों में शामिल एक खास नेटवर्क को खत्म करना था। साथ ही, शेल कंपनियां बनाने और 'म्यूल' बैंक अकाउंट खोलने व चलाने में कथित तौर पर शामिल होने के आरोप में चेन्नई और कोलकाता से दो लोगों को गिरफ्तार किया गया।'
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डिजिटल अरेस्ट के लिए फर्जी डोमेन का इस्तेमाल
खबरों के मुताबिक, इन अकाउंट्स का इस्तेमाल अपराध से जुड़ी लगभग 2 करोड़ रुपये की संदिग्ध रकम को लॉन्डर करने (अवैध पैसे को वैध दिखाने) के लिए किया गया था। हाल ही में CBI ने एक फर्जी वेबसाइट का पता लगाया है, जिसका URL भारत के सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट से मिलता-जुलता था। आरोप है कि धोखाधड़ी करने वालों ने इस फर्जी डोमेन का इस्तेमाल 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर लोगों को ठगने के लिए किया था।
भारत के सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से मिली शिकायत के आधार पर, CBI ने FIR दर्ज की और मामले की जांच शुरू की। जिसके बाद एडवांस्ड फोरेंसिक टूल्स और तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल करते हुए, CBI ने भारत और विदेश में चल रहे आपराधिक नेटवर्क के अहम हिस्सों की पहचान की। जांच से पता चला है कि आरोपियों ने अपनी धोखाधड़ी वाली गतिविधियों को भरोसेमंद दिखाने के लिए नकली और मनगढ़ंत दस्तावेज़ अपलोड किए थे; इनमें अदालतों और अलग-अलग कानून लागू करने वाली एजेंसियों द्वारा जारी किए गए आदेशों जैसे दिखने वाले नकली आदेश भी शामिल थे।
इन चीज़ों को किया गया ज़ब्त
तलाशी के दौरान, कई आपत्तिजनक दस्तावेज़, डिजिटल डिवाइस, मोबाइल फ़ोन और बैंक लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड ज़ब्त किए गए। इन चीज़ों की विस्तृत फ़ोरेंसिक जांच और विश्लेषण किया जा रहा है। CBI को ऐसे सबूत भी मिले हैं जिनसे पता चलता है कि भारतीय नागरिकों के अलावा, कई अन्य देशों के नागरिकों को भी इसी नेटवर्क ने ठगा हो सकता है। संबंधित देशों की कानून लागू करने वाली एजेंसियों को सही माध्यमों से सूचित किया जा रहा है। मामले की जांच जारी है।