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JPC के पास भेजा गया FCRA संशोधन बिल, विपक्ष ने किया विरोध; जानें क्या है पूरा मामला?

JPC के पास भेजा गया FCRA संशोधन बिल, विपक्ष ने किया विरोध; जानें क्या है पूरा मामला?

FCRA Bill: विदेशी चंदे से जुड़े FCRA संशोधन बिल 2026 को बुधवार को लोकसभा में विस्तृत जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC के पास भेजने का प्रस्ताव रखा गया। सरकार के इस कदम का विपक्ष ने विरोध किया। विपक्ष का कहना है कि बिल से NGO, सामाजिक संस्थाओं और धार्मिक संगठनों पर असर पड़ सकता है। यह बिल 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। इसके बाद से ही विपक्ष, सामाजिक संगठनों और कुछ ईसाई संगठनों की ओर से इसका विरोध किया जा रहा था। मंगलवार को सरकार ने संकेत दिया था कि वह बिल को JPC के पास भेजने के लिए तैयार है।

वेणुगोपाल ने किया विरोध 

कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने सरकार के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि बिल को सिर्फ समिति के पास भेजना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित कानून का असर सामाजिक और चैरिटी के काम करने वाले NGOs पर पड़ सकता है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी बिल का विरोध किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सरकार अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने वाला कानून लेकर आई है।

सरकार के सामने रखी गई आपत्तियां

वहीं, बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने विपक्ष के रुख पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष पहले खुद FCRA बिल को JPC के पास भेजने की मांग कर रहा था और अब सरकार के ऐसा करने पर इसका विरोध कर रहा है। बिल को लेकर अलग-अलग पक्षों की ओर से सरकार के सामने आपत्तियां भी रखी गई हैं। DMK सांसद पी. विल्सन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर बिल को वापस लेने या संसदीय समिति के पास भेजने की मांग की थी। मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने भी प्रस्तावित संशोधनों को लेकर गृह मंत्री के सामने चिंता जताई थी।

क्या है FCRA बिल में खास?

बिल में एक Designated Authority बनाने का प्रस्ताव है। अगर किसी संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन खत्म हो जाता है तो इस प्राधिकरण को संस्था के विदेशी चंदे और उससे खरीदी गई संपत्तियों को अपने कब्जे में लेने, उनका प्रबंधन करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें बेचने का अधिकार मिल सकता है। अगर संस्था तय समय में अपना रजिस्ट्रेशन दोबारा हासिल नहीं करती है तो इन संपत्तियों पर स्थायी रूप से अधिकार भी हो सकता है। विदेशी और घरेलू दोनों तरह के पैसों से बनाई गई संपत्तियों के लिए भी बिल में प्रावधान किए गए हैं।

सरकार ने किया विपक्ष के आरोप को खारिज

सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य नियमों में पारदर्शिता बढ़ाना और FCRA रजिस्ट्रेशन खत्म होने की स्थिति में संपत्तियों के प्रबंधन को स्पष्ट करना है। सरकार ने विपक्ष के इस आरोप को खारिज किया है कि बिल किसी खास समुदाय को निशाना बनाता है। अब JPC बिल की विस्तार से जांच करेगी, संबंधित पक्षों की राय ले सकती है और बदलाव की सिफारिश कर सकती है। हालांकि, समिति की सिफारिशें सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं होती हैं।

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