Success Story: भारत में हर साल लाखों छात्र IIT में दाखिले का सपना देखते हैं। लेकिन कई बार परीक्षा में असफलता मिलने के बाद छात्र निराश हो जाते हैं और अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं। ऐसी ही कहानी है प्रियंका वर्गीदिया की, जिन्होंने IIT में दो बार असफल होने के बाद भी हार नहीं मानी और आज दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों में से एक माइक्रोसॉफ्ट में बड़े पद पर काम कर रही हैं।
दो प्रयासों के बाद भी चयन नहीं
प्रियंका ने हाल ही में अपनी प्रेरणादायक यात्रा सोशल मीडिया पर साझा की। उन्होंने बताया कि IIT प्रवेश परीक्षा में दो प्रयासों के बाद भी उनका चयन नहीं हो पाया था। यह उनके लिए मुश्किल समय था, लेकिन उन्होंने निराश होने के बजाय अपने भविष्य के लिए एक बड़ा फैसला लिया। प्रियंका ने उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका जाने का निर्णय लिया। साल 2008 में उन्होंने कंप्यूटर और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में मास्टर डिग्री करने के लिए करीब 40 लाख रुपये का एजुकेशन लोन लिया। यह फैसला उनके और उनके परिवार के लिए आसान नहीं था। उनके पिता ने कर्ज चुकाने की जिम्मेदारी को देखते हुए अपनी जमीन तक गिरवी रख दी थी। यहां तक कि अमेरिका जाने के लिए टिकट का इंतजाम भी कर्ज लेकर किया गया था।
परिवार की रहती थी चिंता
अमेरिका पहुंचने के बाद प्रियंका के सामने कई चुनौतियां आईं। नया देश, अलग शिक्षा प्रणाली और नई संस्कृति में खुद को ढालना आसान नहीं था। पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें अकेले रहना, खाना बनाना, घर संभालना और सीमित पैसों में अपना खर्च चलाना भी सीखना पड़ा। प्रियंका बताती हैं कि उस समय उनके दिमाग में हमेशा एक ही बात रहती थी कि पढ़ाई पूरी होते ही नौकरी हासिल करनी है, ताकि परिवार पर पड़े कर्ज के बोझ को कम किया जा सके। उनकी मेहनत और आत्मविश्वास ने आखिरकार उन्हें सफलता दिलाई।
कहां से ली मास्टर की डिग्री
उन्होंने अमेरिका की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया से अपनी मास्टर डिग्री पूरी की। इसके बाद उनका करियर लगातार आगे बढ़ता गया। साल 2017 में उन्होंने गूगल जैसी बड़ी टेक कंपनी में काम शुरू किया। साल 2021 में उन्होंने एक किताब भी लिखी। साल 2024 में वह माइक्रोसॉफ्ट में सीनियर डायरेक्टर ऑफ एआई ट्रांसफॉर्मेशन के पद पर शामिल हुईं। इसके बाद साल 2025 में उन्होंने प्रतिष्ठित व्हार्टन स्कूल से MBA की डिग्री भी हासिल की।
कैसे मिली सफलता?
प्रियंका का कहना है कि उनकी सफलता किसी असाधारण प्रतिभा की वजह से नहीं, बल्कि लगातार मेहनत, धैर्य और खुद पर भरोसे के कारण मिली है। उनके मुताबिक IIT में मिली असफलता उनके जीवन का अंत नहीं थी, बल्कि वही असफलता उनकी सफलता की शुरुआत बनी। प्रियंका की कहानी उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो किसी परीक्षा में असफल होने के बाद खुद को कमजोर समझने लगते हैं। उनकी यात्रा साबित करती है कि एक हार जिंदगी की आखिरी मंजिल नहीं होती, बल्कि कई बार वही नई शुरुआत का रास्ता खोलती है।
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