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विमल इलायची विवाद पर दिल्ली HC का फैसला, शाहरुख-अजय-टाइगर को भेजे गए महाराष्ट्र FDA के नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

विमल इलायची विवाद पर दिल्ली HC का फैसला, शाहरुख-अजय-टाइगर को भेजे गए महाराष्ट्र FDA के नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

Delhi HC on Vimal Elaichi Controversy: दिल्ली हाई कोर्ट ने 14 सितंबर सोमवार को विमल इलायची बनाने वाली कंपनी पीबी एग्रो एलएलपी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। इस याचिका में महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा ब्रांड एंबेसडरों, जिनमें बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ शामिल हैं, को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि इस मामले की सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र न्यायालय के पास नहीं है। 

विमल इलायची मामला दिल्ली में उत्पन्न नहीं हुआ  

बता दें, न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा ने कहा कि दिनांक 11 अगस्त, 2026 का विवादित नोटिस महाराष्ट्र सरकार के अधीन मुंबई स्थित FDA द्वारा स्वतंत्र रूप से जारी किया गया था और यह मुंबई निवासी तीन ब्रांड एंबेसडरों को संबोधित था। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में विफल रहा है कि मामले का कोई महत्वपूर्ण या मुख्य भाग दिल्ली में उत्पन्न हुआ है। कोर्ट ने पीबी एग्रो के इस तर्क को खारिज कर दिया कि दिल्ली हाई कोर्ट इस मामले में अधिकार क्षेत्र का प्रयोग कर सकता है, क्योंकि कंपनी दिल्ली में स्थित है, उसका विज्ञापन अभियान कथित तौर पर दिल्ली से तैयार और प्रबंधित किया गया था, और ब्रांड एंबेसडरों को भुगतान भी दिल्ली से किया गया था।

कोर्ट ने गौर किया कि पीबी एग्रो को कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया था, न ही कंपनी को कोई जवाब देने, कोई विज्ञापन हटाने, दस्तावेज़ पेश करने या महाराष्ट्र FDA के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया था। न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि पीबी एग्रो द्वारा मांगी गई मुख्य राहत मुंबई स्थित FDA द्वारा जारी नोटिस को रद्द करना था। उस नोटिस के कथित गैर-अनुपालन के लिए कोई भी कार्रवाई उस प्राधिकरण द्वारा ही विचारणीय होगी जिसने इसे जारी किया था। दिल्ली स्थित केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय या भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) को पक्षकार बनाने मात्र से क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र प्राप्त नहीं हो जाता, जबकि उनके विरुद्ध कोई विशिष्ट राहत नहीं मांगी गई थी और न ही उनके द्वारा जारी किसी निर्णय या निर्देश को चुनौती दी गई थी।

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FSSAI ने महाराष्ट्र FDA नोटिस जारी करने निर्देश नहीं दिए

कोर्ट ने इस तथ्य पर भी भरोसा करने से इनकार कर दिया कि FSSAI खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत सर्वोच्च वैधानिक निकाय है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह पता चले कि FSSAI ने महाराष्ट्र FDA को ब्रांड एंबेसडरों के खिलाफ नोटिस जारी करने या कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया था। इसलिए, नोटिस महाराष्ट्र प्राधिकरण की एक स्वतंत्र कार्रवाई बनी रही। कोर्ट ने आगे पाया कि पीबी एग्रो के स्वयं के बयानों से स्पष्ट होता है कि वास्तविक विवाद महाराष्ट्र में था। कंपनी ने स्वयं इस आधार पर नोटिस को चुनौती दी थी कि विमल पान मसाला महाराष्ट्र में प्रतिबंधित है, जबकि कथित तौर पर इसका उत्पादन या बिक्री वहां नहीं होती है, और महाराष्ट्र FDA ने विज्ञापित विमल इलायची उत्पाद को प्रतिबंधित पान मसाले से गलत तरीके से जोड़ा है।

कोर्ट ने कहा कि इन बयानों से यह सिद्ध होता है कि मुख्य विवाद महाराष्ट्र FDA द्वारा महाराष्ट्र में कथित गतिविधियों के संबंध में की गई कार्रवाई की वैधता और औचित्य से संबंधित है। दिल्ली स्थित केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) के समक्ष चल रही कार्यवाही पर न्यायालय ने यह माना कि उनकी लंबितता से दिल्ली उच्च न्यायालय को क्षेत्राधिकार प्राप्त नहीं होता। न्यायालय ने कहा कि सीसीपीए की कार्यवाही और महाराष्ट्र एफडीए का नोटिस प्रथम दृष्टया अलग-अलग प्राधिकरणों की अलग-अलग कार्रवाइयों से उत्पन्न अलग-अलग कार्यवाही हैं। बता दें, याचिका में CCPA के किसी आदेश को चुनौती नहीं दी गई थी और न ही सीसीपीए ने महाराष्ट्र एफडीए के नोटिस के संबंध में कोई आदेश पारित किया था।

तथ्यों का विवाद से प्रत्यक्ष संबंध होना जरूरी

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों का हवाला देते हुए दोहराया कि याचिका में उल्लिखित प्रत्येक तथ्य विवाद के मूल कारण का हिस्सा नहीं होता। क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार प्राप्त करने के लिए तथ्यों का विवाद से प्रत्यक्ष और महत्वपूर्ण संबंध होना आवश्यक है। न्यायालय ने यह भी माना कि यदि दिल्ली में विवाद का कोई अप्रत्यक्ष या आकस्मिक कारण भी उत्पन्न होता है, तो भी सुविधाजनक मंच के सिद्धांत के तहत महाराष्ट्र अधिक उपयुक्त और सुविधाजनक मंच रहेगा, क्योंकि संपूर्ण विवाद और वास्तविक नोटिस प्राप्तकर्ता महाराष्ट्र से संबंधित हैं।

हाई कोर्ट ने पीबी एग्रो द्वारा उद्धृत बख्शीश अहमद बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से स्पष्ट रूप से अंतर बताया। कोर्ट ने कहा कि यह मामला बीएसएफ सदस्य की बर्खास्तगी से संबंधित था और इसमें एक विशिष्ट वैधानिक और प्रशासनिक ढांचा शामिल था जिसके तहत दिल्ली के अधिकारियों की इसमें अनिवार्य भूमिका थी। हाई कोर्ट ने कहा कि वर्तमान मामले में ऐसी परिस्थितियां मौजूद नहीं हैं। तदनुसार, हाई कोर्ट ने माना कि क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार के अभाव में याचिका विचारणीय नहीं है और पीबी एग्रो के लिए FDA नोटिस से संबंधित अपनी शिकायतों को उठाने के लिए महाराष्ट्र की अदालतें ही उपयुक्त मंच हैं। पीबी एग्रो की चुनौती के गुण-दोष पर न्यायालय द्वारा कोई राय व्यक्त किए बिना याचिका खारिज कर दी गई।

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