Pakistan Economic Crisis: पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। पहले से ही कर्ज के बोझ तले दबे देश पर अब मिडिल ईस्ट तनाव और तेल-गैस संकट का बड़ा असर पड़ा है। होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट की आशंका और अमेरिका-ईरान तनाव के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे पाकिस्तान में हालात और बिगड़ गए हैं। सबसे ज्यादा असर दवाइयों पर देखने को मिल रहा है। देश के बड़े शहरों जैसे लाहौर, कराची और पेशावर में सरकारी अस्पतालों में दवाओं की भारी कमी हो गई है। मरीजों को इलाज के लिए परेशान होना पड़ रहा है और कई जरूरी दवाएं बाजार में उपलब्ध नहीं हैं।
लगातार बढ़ रही दवाओं की कीमत
रिपोर्ट्स के अनुसार, दवाओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। 2024 में दाम करीब 50% बढ़े थे, जबकि 2025 में फिर 30-40% तक की बढ़ोतरी हुई। 2026 में यह संकट और गहरा गया है। अब हालात यह हैं कि हर 15-20 दिनों में दवाओं के दाम बदल रहे हैं। इस संकट की बड़ी वजह वैश्विक सप्लाई चेन में रुकावट और कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी है। शिपिंग कॉस्ट बढ़ने से दवा बनाने का खर्च भी ज्यादा हो गया है। इसके अलावा सरकार द्वारा कच्चे माल पर टैक्स लगाने से भी समस्या बढ़ी है।
सरकार पर उठ रहे सवाल
शहबाज शरीफ की सरकार पर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि ऊर्जा आयात पर निर्भरता के कारण देश की हालत और खराब हो रही है। पाकिस्तान अपनी 85-90% ऊर्जा जरूरतें खाड़ी देशों से पूरी करता है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर महंगाई पर पड़ा है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से खाने-पीने की चीजों के दाम भी बढ़ गए हैं। अब दवाओं की कमी और महंगाई ने आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो पाकिस्तान में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
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